बाबरी मस्जिद विवाद: आखिर 6 दिसंबर 1992 को हुआ क्या था? पढें ये रिपोर्ट




 बाबरी मस्जिद से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यह एक संवेदनशील और भावनात्मक मामला है. कोर्ट ने कहा कि ‘संवेदनशील मसलों का आपसी सहमति से हल निकालना बेहतर है.’

बाबरी मस्जिद विवाद: आखिर 6 दिसंबर 1992 को हुआ क्या था?
आज से करीब 25 साल पहले अयोध्या में पहुंची हिंदू कार सेवकों की लाखों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था तब सूबे में कल्याण सिंह की सरकार थी जो अभी राजस्थान के राज्यपाल हैं.
उस दिन देश भर से हजारों कार सेवक अयोध्या पहुंच रहे थे. विश्व विंदू परिषद, बजरंग दल सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता अयोध्या में मौजूद थे. सुबह करीब साढ़े दस बजे का वक्त था जब हजारों कार सेवक हजारों पुलिस वालों की मौजूदी में विवादित ढांचे तक पहुंच गये. हर किसी की जुबां पर उस वक्त जय श्री राम का ही नारा था.
विवादित ढांचे तक पहुंचने के साथ ही भीड़ उन्मादी हो चुकी थी. इस वक्त तक ढांचे की सुरक्षा को खतरा पैदा हो चुका था. ढांचे के आसपास करीब एक लाख कार सेवक पहुंच चुके थे. अयोध्या में स्थिति भयानक हो चुकी थी.
पुलिस के आला अधिकारी मामले की गंभीरता को समझ रहे थे लेकिन गुंबद के आसपास मौजूद कार सेवकों को किसी को रोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी. मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का साफ आदेश था कि कार सेवकों पर गोली नहीं चलेगी.
तत्कालीन एसएसपी अखिलेश मेहरोत्रा बताते हैं कि हर किसी को अनहोनी की आशंका हो चुकी थी. अयोध्या पहुंचने वाले तमाम रास्ते बंद कर दिये गये. बाकी जो कार सेवक रास्ते में थे उन्हें वहीं रोक दिया गया.
इसके बाद जैसे जैसे दिन चढ रहा था भीड़ उन्मादी होकर विवादित ढांचे को तोड़ने की तैयारी कर रही थी. वहां मौजूद हजारों पुलिस वालों में से किसी को रोकने की हिम्मत नहीं थी. अयोध्या में सुरक्षा के लिहाज से उस दिन दस हजार से ज्यादा पुलिस वाले लगाए गए थे.
अयोध्या के तत्कालीन एसएचओ पीएन शुक्ला बताते हैं कि भीड़ में हर कोई गुंबद को तोड़ने में नहीं जुटा था लेकिन माहौल ही ऐसा हो गया था कि उन्मादियों को वहां मौजद हर शख्स का मानो समर्थन मिल रहा था.
दोपहर के तीन बजकर चालीस मिनट पर पहला गुंबद भीड़ ने तोड़ दिया और फिर 5 बजने में जब पांच मिनट का वक्त बाकी था तब तक पूरा का पूरा विवादित ढांचा जमींदोज हो चुका था. भीड़ ने उसी जगह पूजा अर्चना की और राम शिला की स्थापना कर दी.
हजारों पुलिस वालों की मौजूदगी में करीब डेढ लाख लोगों की भीड़ इस घटना की गवाह बनी बात में तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने इस घटना को अपने लिए खुशी का दिन बताया. इस घटना ने देश की राजनीति उसी दिन से बदलकर रख दी. 6 दिसंबर को विवादित ढांचा गिरा और इसके बाद केंद्र सरकार ने कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त कर दी थी.

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