‘शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करवाकर तिहाड़ भेजने में लालू की अहम भूमिका’




11 साल की सजा काटने के बाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत के बाद जेल से बाहर आए सिवान के विकास पुरूष पूर्व सांसद डा0 मो0 शहाबुद्दीन ने आखिर ऐसा किया कह दिया कि उनको दोबारा जेल जाना पड़ा वह भी बिहार से तिहाड़. सोचने का विषय है कि जो आदमी 11 साल की सजा काट कर बाहर आया हो उसे इतनी जल्दी क्यों सलाखों के पीछे धकेल दिया गया इसका असल मास्टर माईंड लालू प्रसाद यादव है.
मिस्टर शहाब ने सिर्फ लालू यादव को अपना नेता बोल कर गुनाह किया क्योंकि लालू प्रसाद यादव अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी राजनिती अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है इसलिए बेटा को मैदान में लाना होगा और अगर शहाब बाहर रहे तो उनकी पार्टी में उनसे बड़ा विकास पुरूष एवं जनता का नेता कोई और नहीं है इसलिए उन्होंने अपने बेटा की कुर्सी बचाने के लिए शहाब के साथ धोखा किया है और उन्को साजिश के तेहत तिहाड़ भेजवाया है. इसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी लालू प्रसाद यादव ने इस्तेमाल कर लिया है. लालू प्रसाद यादव वहीं शख्स है जिसने कभी शहाब की नैया पर बैठ कर अपनी राजनिती को चमकाया था और आज जब वही शहाब 11 साल बाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत पर रिहा होकर लौटे तो उन्हें दोबारा सलाखों के पीछे धकेलने वाला कोई और नहीं सिर्फ और सिर्फ लालू प्रसाद यादव है.
अगर वाकई लालू प्रसाद यादव ईमानदार होते तो इस बात से बखुबी अन्दाजा लगाया जा सकता है कि शहाबुद्दीन ने जेल से बाहर आकर किया बोल दिया जिसकी उनकों इतनी बड़ी सजा दी गई. शहाब ने यही तो कहा था कि ’’नीतीश कुमार हमारे नेता नहीं हैं लालू प्रसाद यादव हमारे नेता हैं’’ वह भी लालू प्रसाद यादव के इशारे पर बोला गया लेकिन लालू प्रसाद यादव ने शहाब के साथ बड़ा धोखा किया और नीतीश कुमार को अपना मोहरा बनाकर शहाब को तिहाड़ भेजवाने का काम किया है. रामजेठ मलानी को भी केस नहीं लड़ने का आदेश देने वाला कोई और नहीं लालू प्रसाद यादव ही है.
लेकिन लालू प्रसाद यादव यह क्यों भूल गए हैं बिहार में अब उन्का जंगलराज नहीं चलेगा. बेटा को नेता बनाने के चक्कर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बौना एवं बंधुआ मजदूर बनाकर अधिक दिनों तक राजनिती नहीं कर सकते. बिहार के मुस्लिम समुदाय में शहाब को बिहार से तिहाड़ भेजे जाने के कारण काफी आक्रोश है और बढ़ता ही जा रहा है. यही कारण है कि बिहार के मुस्लिम समुदाय इस मामले को लेकर होली के बाद सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं. बिहार में अगर किसी ने मुसलमानों का शोषण किया है तो उसमें लालू प्रसाद यादव की अहम भूमिका है.
लालू प्रसाद की अंतिम राजनिती है अगर अब भी इन्होंने आँखें नहीं खोली और शहाब को जेल से बाहर लाने की प्रकृया तेज नहीं किया, मुसलमानों के विकास कार्य को तेजी से आगे नहीं बढ़ाया साथ ही मुस्लिम नेताओं को सम्मान नहीं दिया तो अगली सरकार और अपने बेटा को मुख्यमंत्री बनाने का सपना देखना छोड़ दें. आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से माँग करता है कि वह शहाबुद्दीन के साथ हो रही ना इंसाफी में अपना सहयोग दें और उन्की जल्द रिहाई का का रास्ता निकालें ताकि अल्पसंख्यकों के बीच पनप रहे गुस्से को विराम लगाया जा सके और सरकार पर अल्पसंख्यकों का विश्वास बना रह सके.
इस आर्टिकल के सभी विचार लेखक के हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवा


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