वोट के लिए ऊना के दलितों पर आंसू बहाने वाले मोदी क्या अब एक निर्दोष मुस्लिम की हत्या पर भी कुछ बोलेंगे? – अभिसार शर्मा का बलॉग




पहलू खान को फांसी पर ही तो चढ़ाया गया है। अखलाक के बाद। ऊना मे भी ऐसा ही किया गया था। एक तरफ आपके नेता अनापशनाप बयान देते हैं, जिसे सुनकर राष्ट्रवादी गुंडे लोगों को फांसी पर चढ़ाने पहुंच जाते हैं।

गाय का नाम बदनाम न करो। प्लीज़! आज मै वो तस्वीरें आपके सामने रख रहा हूँ जो मेरे निजी जीवन की हैं, माँ के साथ मैं भी गाय के प्रति प्रेम और श्रद्दा के चलते गाय को नियमित रूप से चारा खिलाता हूं। सुकून मिलता है। मगर गाय के प्रति मेरे प्रेम और सामाजिक न्याय के प्रति मेरी ज़िम्मेदारी मे कोई विरोधाभास या टकराव नही है। एक सवाल आस्था का है और एक न्याय का। उम्मीद है रमण सिंह, निर्मला सीतारमण और गुलाबचंद कटारिया भी इस बात को समझेंगे। मेरे ऐसा कहने के पीछे वजह है —

बात सत्तर साल की चलेगी तो बहुत दूर तलक जाएगी। आज़ादी के आंदोलन मे आरएसएस के किरदार पर भी बातें होंगी । और फिर ये लोग पूछेंगे संघ को अपने दफ्तर मे तिरंगा फहराने मे इतने साल क्यों लग गए।

आदरणीय निर्मला सीतारमण (Commerce Minister Nirmala Sitharaman) का कहना है कि ‘गौ रक्षा हमारी आजादी के आंदोलन का हिस्सा थी’, लिहाज़ा इस कोशिश को बेमानी न करार दिया जाए। निर्मलाजी आप सत्ता पर आसीन उन गिने चुने मंत्रियों मे से हैं, जिनकी मै निजी तौर पर इज्जत करता हूं। आप बीजेपी की सर्वश्रेष्ठ प्रवक्ता हैं। मगर लोकसभा में दिया गया आप का यह वक्तव्य समझ के परे है। स्वतंत्रता संग्राम? बात सत्तर साल की चलेगी तो बहुत दूर तलक जाएगी। आज़ादी के आंदोलन मे आरएसएस के किरदार पर भी बातें होंगी । और फिर ये लोग पूछेंगे संघ को अपने दफ्तर मे तिरंगा फहराने मे इतने साल क्यों लग गए।

मेरे अज़ीज़ हुक्मरानो, सवाल किसी की जान का है। बेकसूर मारा जा रहा है। आपका एक एक शब्द उस राष्ट्रवादी गुंडे के लिए हत्या को अंजाम देने का लीगल फरमान है।

बात दरअसल ये है कि मौजूदा हालात को देखते हुए, अलवर मे पहलू ख़ान की हत्या के मद्देनज़र निर्मला जी का बयान बेहद आपत्तिजनक है। आप संवेदनशीलता को समझने की कोशिश तो कीजिये! गाय के नाम पर इस देश में लोगों को मारा जा रहा है। हत्या हुई है। बीजेपी शासित राजस्थान सरकार के लिए मारे गए व्यक्ति और उसके हत्यारों मे कोई फर्क ही नही है।


बावजूद इसके कि पहलू खान एक गौ स्मगलर नहीं था, दोनो पक्षो के खिलाफ केस कर दिया गया है। वह एक किसान था। उसके पास गाय को उसके दूध के लिए इस्तेमाल के लिए ख़रीदने और के जायज़ दस्तावेज़ थे। फिर भी उसको मार दिया गया। और राजस्थान सरकार दोनो पक्षों मे एक बेमानी समानता कायम कर रही है।
जबकि एक आरोपी है और एक पीड़ित। राजस्थान सरकार ने मानो उस गुंडई को जायज़ ठहराने का बीड़ा उठा लिया है। बुधवार रात राज्य के होम मिनिस्टर से जब निधि राज़दान के कार्यक्रम मे जवाब नहीं देते बना तो वो कार्यक्रम को बीच मे ही छोड़कर भाग गए। वाह रे राष्ट्रवादी और वाह रे तुम्हारी दिलेरी। कार्यक्रम का लिंक यहां है।
बीजेपी हत्यारे और पीड़ित के बीच समानता कायम करने का यह काम पहली बार नही कर रही । अखलाक़ की हत्या के बाद पार्टी के नेताओं के गैर ज़िम्मेदाराना बयानों की लम्बी फेहरिस्त है। अखलाक़ की हत्या के आरोपी की दुखद मौत के बाद उसके शव को तिरंगे मे लपेटा गया और फिर उसे श्रद्धांजलि देने बीजेपी के बड़े बड़े दिग्गज पहुंचे थे। 300 प्लस सीटों के लिये इतना तो बनता ही है। क्यों? मगर इस सियासत मे आप एक चीज़ भूल जाते हैं। ऐसे बयान देकर गौ रक्षा के नाम पर अराजकता फ़ैलाने वालों को नैतिक लाइसेंस दे देते हैं।

मेरे भाई तुम्हारे गौ प्रेम ने तुम्हे सिर्फ नफरत सिखाई है, नफ़रत जो गाय के स्वभाव के खिलाफ है…

छत्तीसगढ़ के सीएम तो गौ हत्या करने वालों को फांसी की सज़ा की बात कहते हैं । याद है न आपको? पहलू खान को फांसी पर ही तो चढ़ाया गया है। अखलाक के बाद। ऊना मे भी ऐसा ही किया गया था। एक तरफ आपके नेता अनापशनाप बयान देते हैं, जिसे सुनकर राष्ट्रवादी गुंडे लोगों को फांसी पर चढ़ाने पहुंच जाते हैं। रमण सिंह सरीके नेता भूल जाते हैं कि ऐसे बयान देकर वो खुद प्रधानमंत्री मोदी की अपील की तौहीनी कर रहे हैं जिसमे उन्होने गौ रक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने से मना किया।
जब संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग ऐसी बातें करते हैं, तब अंध भक्तों मे इसका क्या संदेश जाता है, इसकी बानगी आपके सामने है। मगर जब ज़ीरो काम से आपको बम्पर सीटें मिल रही हों और वो भी गौ, श्मशान करके, तो परवाह किसे है संवेदनशीलता का। मगर मेरे अज़ीज़ हुक्मरानो, सवाल किसी की जान का है। बेकसूर मारा जा रहा है। आपका एक एक शब्द उस राष्ट्रवादी गुंडे के लिए हत्या को अंजाम देने का लीगल फरमान है। लिहाज़ा समानता कायम मत कीजिए हत्यारे और पीड़ित के बीच। स्वतंत्रता संग्राम की दुहाई मत दीजिए।
मौजूदा हालात मे गौरक्षा की प्रासंगिकता पर चिंतन मनन कीजिए। उसके नाम पर हो रही गुंडई को संबोधित कीजिए। जानता हूं सियासी तौर पर ये आपके लिए लाभकारी नहीं है, मगर पहलू खान भी इस देश का नागरिक है, उसकी हत्या के बाद डर मे जी रहे लोग भी देश के नागरिक हैं। उसके मन को टटोलिए। मुझे याद है जब ऊना मे दलितों पर हमला हुआ था, तब मोदीजी का दर्द छलका था। पहलू खान की हत्या पर भी कुछ कह दीजिए मोदीजी। वैसे अभी तो चुनाव भी नही है। वोट कटने का डर भी नही होगा।
इतना बताता चलूँ कि तुम मुझसे बड़े गौ भक्त नही हो. तुम्हारे लिए पूर्वोत्तर मे सत्ता पाना ज्यादा ज़रूरी है, लिहाज़ा वहां गौ माता कटती रहे, तब तुम्हे कोई दिक्कत नहीं. तुम्हे अपने नेता एन साईप्रकाश के यह कहने पर भी दिक्कत नहीं है कि ‘किसी की पसंद के भोजन को चुनने में कुछ भी गलत नहीं है और वह (एन साईप्रकाश ) लोकसभा के लिए निर्वाचित होने पर अपने क्षेत्र में कानूनी वधशाला बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। मेरे भाई तुम्हारे गौ प्रेम ने तुम्हे सिर्फ नफरत सिखाई है, नफ़रत जो गाय के स्वभाव के खिलाफ है। यही समस्या तुम्हारे खोखले राष्ट्रवाद की है। उस पर चर्चा बाद मे। खुश रहो। शांत रहो।

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