हम तुम्हारी गोलियों से नहीं डरतें और तुम हमारे हिजाब से ही डर गए : राजीव शर्मा का बेहतरीन लेख




मैं कभी ब्रिटेन नहीं गया लेकिन इस मुल्क के बारे में काफी पढ़ा है। इसकी एक वजह शायद यह है कि हमारे इतिहास में ब्रिटेन के कई अध्याय हैं। मेरा मुल्क करीब 200 सालों तक ब्रिटेन का गुलाम रहा, इसलिए मुझे ब्रिटेन को पढ़ना पड़ा।
जब कभी मैं ब्रिटेन के बारे में पढ़ता हूं तो मुझे दो तरह की तस्वीरें नजर आती हैं। मैं पहली तस्वीर में एक ऐसा महान लोकतंत्र देखता हूं जिसके पास अंग्रेजी जैसी खूबसूरत भाषा है। जिसकी प्राचीन इमारतें, पेंटिंग किसी का भी दिल जीत सकती हैं। जो आकार में बहुत बड़ा नहीं है लेकिन उसके पास दुनिया के महानतम दार्शनिक, वैज्ञानिक और साहित्यकार हैं।
दूसरी तस्वीर कुछ अलग है। क्या वह कोई और ब्रिटेन है जो कारोबार के इरादे से भारत आता है, यहां हुकूमत करता है और फिर शुरू होता है जुल्म का ऐसा सिलसिला जिसकी मिसाल कहीं और नहीं मिलती? क्या हिंदू और क्या मुसलमान, अंग्रेज हर उस गर्दन में फांसी का फंदा डालने को आमादा थे जो उनके सामने झुकने से इन्कार कर देती।
मत भूलिए, यह वही ग्रेट ब्रिटेन था जो लंदन में मानवता का पाठ पढ़ाता रहा लेकिन भारत के बादशाह बहादुरशाह जफर को तस्तरी में उनके दो बेटों के कटे हुए सिर पेश किए। मगर हम हिंदुस्तानियों की सहनशीलता देखिए, 200 साल हमने अंग्रेजों को बर्दाश्त किया।
वो जुल्म के पहाड़ तोड़ते रहे, हमारा मुल्क तोड़ गए, माल-दौलत और बहुत कुछ ले गए, हमारे देशवासियों को बेहिसाब फांसियां दीं, लेकिन इस सरजमीं की एक भी मस्जिद, एक भी मंदिर में हमने ब्रिटेन की तबाही के लिए प्रार्थना नहीं की। मंदिरों में विश्व के कल्याण की प्रार्थना और मस्जिदों में पूरी दुनिया की खुशहाली के लिए अज़ान गूंजती रहीं।
आज मैंने ये सब बातें एक तस्वीर देखने के बाद लिखी हैं। यह तस्वीर किसी साफिया खान नामी लड़की की है। इन दिनों ब्रिटेन में एक कट्टरपंथी संगठन इंग्लिश डिफेंस लीग (ईडीएल) खूब फैल रहा है।
यह खासतौर से ब्रिटेन में रहने वाले मुसलमानों को निशाना बनाता है। इसे लगता है कि इस्लाम जल्द ही उनके देश पर कब्जा जमा लेगा। यह खूब विरोध-प्रदर्शन कर रहा है और इसके निशाने पर कुरआन तथा मुसलमान होते हैं। ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान इस संगठन के लोगों की नजर किसी मुस्लिम औरत पर पड़ी। वह हिजाब पहने थी। उसे निशाने पर लेना ईडीएल के लोगों को सबसे ज्यादा आसान लगा।
वे उसके करीब आए और उसे घेरकर इस्लाम विरोधी नारे लगाने लगे। तभी साफिया खान वहां आई और महिला के बचाव में खड़ी हो गई। ऐसा होना भी चाहिए। कोई मुसलमान हो या हिंदू, जैन, ईसाई अथवा कोई और, किसी को भी सताना, मारना-पीटना उचित नहीं है।
यह तस्वीर उसी समय खींची गई थी। मुझे ईडीएल कार्यकर्ताओं के चेहरों पर नफरत और साफिया की निगाहों में ब्रिटेन का सुनहरा भविष्य नजर आता है।
हे ईडीएल के महान लोगों, हम 200 साल तक तुम्हारे बाप-दादाओं की चाबुक का सामना मुस्कुराकर करते रहे। हमने ब्रिटेन में कदम क्या रखा, तुम्हें अपना वजूद ही खतरे में नजर आने लगा! हम तुम्हारी गोलियों और तोपों से नहीं डरे, तुम तो कुरआन और हिजाब से ही डर गए! बहुत बुज़दिल हो भाई।

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