सोनू निगम एक बार फिर ट्विट किया: और इस बार मस्जिद के साथ साथ मंदिर पर भी उठाए सवाल




नई दिल्ली: अज़ान कंट्रोवर्सी में घिरे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर सोनू निगम ने कहा है कि वो अभी अपने बयान पर कायम है. सोनू निगम ने ट्विटर पर लिखा है कि ‘आपका स्टैंड आपका अपना IQ बताता है. मैं अपने बयान पर कायम हूं कि मस्जिद और मंदिर में लाउडस्पीकर प्रयोग करने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए.’
इसके बाद सोनू निगम ने एबीपी न्यूज़ के ही एक ट्वीट को कोट करते हुए लिखा है, ‘मेरा बयान अज़ान या आरती के लिए नहीं है बल्कि लाउडस्पीकर के लिए है.’ आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने लाउडस्पीकर को जरुरी नहीं बताते हुए सोनू निगम का समर्थन किया है. अहमद पटेल ने ट्वीट करके कहा है, ‘नमाज के लिए अजान महत्वपूर्ण है. आज के आधुनिक जमाने में लाउडस्पीकर जरूरी नहीं है.’ एबीपी न्यूज़ के इसी खबर को कोट करते हुए सोनू ने लिखा है, ‘मैं अहमद पटेल का सम्मान करता हूं. सेंसिबल लोग इस तरह  किसी बात का मतलब निकालते हैं.’

सोनू निगम ने आज म्यूजिक कंपोजर साजिद खान का भी जवाब दिया है. साजिद खान ने लिखा था, ‘सबके आप अपने विचार होते हैं लेकिन उन्हें बिना किसी की भावनाओं को आहत करते हुए व्यक्त करना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि आप समझेंगे.’ इसके जवाब में सोनू ने लिखा है, ‘अगर आप एक मुस्लिम नहीं बल्कि भारत के नागरिक की तरह होकर सोचेंग तो पता चलेगा कि लोग किस बारे में बात कर रहे हैं, प्यार..’
क्या है पूरा मामला-
कल सुबह सोनू निगम ने ट्वीट किया था, ‘भगवान सबको आशीर्वाद दें. मैं मुस्लिम नहीं हूं लेकिन रोज सुबह मुझे अजान की आवाज से उठना पड़ता है.’ उन्होंने आगे लिखा था, ‘आखिर कब भारत से ये जबरन धार्मिक भावना थोपना खत्म होगा? वैसे जब मोहम्मद ने इस्लाम बनाया था तब बिजली नहीं थी.’ निगम ने ये भी कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई मंदिर या गुरुद्वारा बिजली का इस्तेमाल उन लोगों को जगाने के लिए करते हैं जो उस धर्म का पालन नहीं करते. तो फिर ऐसा क्यों?  गुंडागर्दी है बस.’
इसके  बाद  से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है.  यहां लोग दो हिस्सों में बट गए हैं कोई इस सिंगर की बात को सही बता रहा है तो कोई उसकी आलोचना कर रहा है.
क्यों होती है अजान?
मस्जिद में लोगों को बुलाने के लिए अजान दी जाती है. अजान का मतलब होता है पुकारना या घोषणा करना. अजान दिन में पांच बार नमाज से पहले होती है. लेकिन लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर पहले भी कोर्ट तक मामला जा चुका है.
साल 2014 में नवी मुंबई में एक शख्स मस्जिदों में अजान के लिए लगे लाउडस्पीकर को लेकर कोर्ट चला गया. आरटीआई से पता लगा कि 49 में से 45 मस्जिदों में अवैध तरीके से लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हो रहा था. हाईकोर्ट ने तब इन लाउडस्पीकर को हटाने का आदेश दिया था.

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