इस्राइल छोड़कर भाग रहे हैं यहूदी-इस्राइली सरकार हुई परेशान: जानिये क्युं इस्राइल छोडने पर मजबुर है यहुदी




यहूदियों द्वारा इस्राईल छोड़ कर यूरोपीय और पश्चिमी देशों की तरफ़ भागने ने इस्राईल को चिंता में डाल दिया है।
हार्टर्ज़ न्यूज़ पेपर में इस्राईली लेखक “रोजील अलफेर” ने “इस्राईल हमारा देश है लेकिन हम इसमें जीवन नहीं व्यतीत कर सकते” के शीर्षक से एक लेख इस्राईल छोड़ कर किसी और देश में बसने के बारे में लिखा कि इस्राईल में रहने के लिए हमें बहुत कुछ क़ुरबान करना पड़ता है जो इस्राईल में रहन के लिए बहुत बड़ी क़ीमत है।
इसी समाचार पत्र में राजनीतिक विश्लेषक दयऊन लीफिनी ने लिखा जिसमें उन्होंने लिखाः “आज के समय में इस्राईल यहूदियों के रहने के लिए सबसे ख़तरनाक स्थान है”
विशेषज्ञों के अनुसार यहूदियों का इस्राईल से उलटा प्रवास इस्राईल के अस्तित्व और ज़ायोनी शासन के गठन के लक्ष्यों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है।
हाआर्तज़ समाचार पत्र ने अपनी रिपोर्ट में रूस के यहूदियों के इस्राईल छोड़कर रूस में बसने और इसी प्रकार पश्चिमी देशों के यहूदियों द्वारा इस्राईल छोड़ने की ख़बर दी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार कई रूसी यहूदियों ने रूस में अपनी सम्पत्ती को बचाए रखा था, वास्तव में उन्होंने कभी भी अपने आप इस्राईली नहीं समझा।
इस्राईल मामलों के विशेषज्ञ नाजी अलतहा ने कहा है कि इस्राईल से यहूदियों का पलायन ज़ायोनी शासन को अंधकारमयी चरण में पहुँचा देगी।
उन्होंने कहाः आबादी के टकराव में ज़ायोनी शासन की परियोजना विदेशिंयों पर टिकी हुई है।
इस्राईली आंकड़ों के अनुसार फिलिस्तीन में जनसंख्या दर वृद्धि 3.5 है जबकि इसराइल में केवल 1.7 है।
नाजी अलबतहा ने हाआर्टज़ समाचार पत्र में 6 हज़ार यहूदियों जर्मनी प्रवास की रिपोर्ट के बारे में कहा है कि: इस्राईल छोड़कर जाने वालों में अधिकतर निवेशक, सेना के कमांडर और सांस्कृतिक हस्तियां हैं। जबकि इस्राईल में आने वाले यहूदी अक्सर गरीब हैं, और मदद की उम्मीद में इस्राईल आते हैं।
परिणाम स्वरूप कुछ वर्षों बाद इस्राईल यहूदियों का समाज गरीब नागरिकों पर सीमित होकर रह जाएगा।
गाज़ा पर हमला भी इस्राईल छोड़ने का एक कारण है, जिससे जनता में भय और घबराहट पैदा हो गया है।
उन्होंने इस बारे में कहा कि इस मामले ने फ़िलिस्तीन में रहन वाले ज़योनियों को इतना प्रभावित किया है कि वह सोचते हैं कि अब इस्राईल उनके रहने की जगह नहीं है।
यूरोपीय मामलों के विशेषज्ञ हस्सान शाकिर ने इस्राईल से भागते यहूदियों के बारे में लिखा है कि ये चीज़ फ़िलिस्तीन में जनसंख्या संतुलन में बहुत प्रभावी होगा।
यह समस्या इस्राईल संस्थाओं को लिए खतरे की घंटी है, कि इस्राईल में रहने वाली एक तिहाई आबादी कभी भी यहां की मूल निवासी नहीं रही है।
इस्राईल के चैनल 10 के अनुसार इस देश की 50% आबादी इस्राइल से निकलने की सोच रही है।
इस जनतम संग्रह का परिणाम 27 अक्टूबर 2014 को अल हयात समाचार पत्र में प्रकाशित किया था।
इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री इसहाक राबीन हैं जिनकी उग्रवादी यहूदियों ने हत्या कर दी थी ने इस्राईल के प्रवासी यहूदियों के बारे में कहा थाः वे घटिया लोग हैं। उन्होंने उनके लिए तलमूद की परिभाषा यरदीम का प्रयोग किया था।
इस शब्द का अर्थ “तुच्छ, अपराधी और धोखेबाज़ है” जो दुश्मन के सामने हार मान ले, और जो इस्राईलल परियोजना के विरोधी हैं।

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