मंगलोर: आतंकवाद के आरोप से 9 साल बाद 4 मुसलमानों को कोर्ट ने बेगुनाह कह कर बरी किया




मुंबई: मंगलोर की एक विशेष अदालत ने आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य होने और भटकल बंधुओं की मदद करने के आरोप में 4 मुस्लिम नौजवानों को बाइज़्ज़त बरी कर दिया।
ख़बर के मुताबिक़, यह रिपोर्ट मुंबई में आरोपियों को कानूनी मदद करने वाली संस्था जमीयत उलेमा ए महाराष्ट्र (अरशद मदनी) की कानूनी सहायता समिति के प्रमुख गुलजार आजमी ने दी है।
गुलजार आजमी ने बताया कि आरोपी सैयद अहमद नौशाद, अहमद बावा अबूबकर और फकीर अहमद को अदालत ने दोषी ठहराया है, जबकि मोहम्मद अली, जावेद अली, शब्बीर अहमद और मोहम्मद रफीक को बाइज़्ज़त बरी कर दिया है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2008 में रियाज़ भटकल और इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े लोगों को शरण देने और इस आतंकी संगठन से जुड़े होने के आरोप में मंगलोर पुलिस ने सैयद मोहम्मद नौशाद, अहमद बाबा, मोहम्मद अली, जावेद अली, मोहम्मद रफीक, फकीर अहमद और शब्बीर भटकल को गिरफ्तार किया था।
उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 (बी), 121 (ए), 122,123,153 (ए) 122,420, 468,471 और यूएपीए कानून के प्रावधानों 10, 11, 13, 16,17,18,19,20,21 सहित आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ रखने की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गुलजार आजमी ने कहा कि इस मामले में सात आरोपियों को अदालत ने दो साल जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा किया था।
लेकिन मामले की सुनवाई शुरू होने में पांच साल का समय लग गया, 13 जनवरी 2016 को आरोपियों के खिलाफ चार्जेज़ फ्रेम किए गए और इसके तुरंत बाद बचाव पक्ष के वकीलों की याचिका पर 18 जनवरी से ट्रायल शुरू हो गया।
उन्होंने बताया कि मंगलोर की विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ गवाही देने के लिए 90 गवाहों को पेश किया जिसमें पुलिस अधिकारी, जांच अधिकारी, फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के अधिकारी और अन्य शामिल थें।

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