UP: पुलिस ने तीनों का नाम पुछा फिर सुभाष को जाने दिया और बचे दो मुसलिमों की पिटाई शुरू कर दी




रिहाई मंच ने यूपी की बलिया पुलिस पर मुसलमानों को धार्मिक द्वेष से पीटने का आरोप लगाया है। मंच ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की और कहा है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश की पुलिस बजरंगदल-हिंदू युवा वाहिनी की तरह व्यवहार करने लगी है, जिससे पुलिस की अपनी विश्वसनियता ही खतरे में पड़ गई है।
रिहाई मंच ने इस घटना को पहलू खान की बर्बर हत्या से भी खतरनाक बताते हुए कहा कि वहां तो अपराधियों ने मुसलमान को उसके धार्मिक पहचान के आधार पर मारा। लेकिन यहां तो यूपी पुलिस ने यह काम खुद किया है।
रिहाई मंच के बलिया जिले के महासचिव बलवंत यादव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 6-7 अप्रैल की रात को ग्राम बहेरी निवासी इसरार खान (48) साल पुत्र मंगरू खान, मुश्ताक उर्फ दौलत (25) साल पुत्र मुल्तान और सुभाश बिंद (25) साल पुत्र सुरेश बिंद मछली मारने के लिए लालगंज धाना क्षेत्र स्थित गंगा घाट गए थे।
रात साढ़े 12 बजे के करीब चार पुलिसकर्मी, जिनमें से एक सादी वर्दी में सम्भवतः दारोगा भी थे, आए और उनसे पूछताछ की।
पीड़ितों के यह बताने पर कि वे मछली मारने आए हैं। उन्होंने मछली पकड़ने के लिए लाया गया झोला और उसमें रखा चारा दिखाकर पुलिस वालों को बताया कि वे ये काम कई सालों से कर रहे है।
इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उनसे उनका नाम पूछा। लेकिन जब उन्होंने अपना नाम इसरार, मुश्ताक और सुभाष बताया तो पुलिस वालों ने सुभाष को दो-तीन थप्पड़ मार कर वहां से भगा दिया और बाकी दो को मां-बहन की गालियां बकते हुए पीटने को कहा।
इसके बाद सभी पुलिस वालों ने मिलकर उन दोनों की बुरी तरह पिटाई की। इतना ही नहीं फिर वे उन्हें चैकी ले गए जहां फिर से उन्हें सम्प्रदाय सूचक गालियां देते हुए डंडों से पीटा। इसके बाद पुलिस वालों ने बाद में उन्हें यह कहते हुए वहां से भगा दिया गया कि फिर दोबारा इधर दिखे तो अंजाम बुरा होगा।
इस दौरान पुलिसकर्मियों ने मुश्ताक उर्फ दौलत का डूवल सिम मोबाईल भी छीन लिया।
बलवंत यादव ने बताया है कि घटना की सूचना मिलने पर 10 अप्रैल को उन्होंने, इंडियन पीपुल्स सर्विसेज (असईपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद गोंडवाना, रिहाई मंच के जिला अध्यक्ष डॉ. अहमद कमाल, सचिव मंजूर आलम, रोशन अली के साथ जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने दोनों पीड़ितों का इलाज जिला अस्पताल में करवाया।
वहीं दूसरी तरफ आईपीएस नेता अरविंद गोंडवाना ने कहा कि पीड़ित योगी सरकार में पुलिस के खिलाफ शिकायत करने से डर रहे हैं। उन्हें इस बात का डर है कि पुलिस उन्हें आगे चलकर फिर किसी मामले में न फंसा दे।
गोंडवाना ने कहा कि जब पुलिस ही जनता को धर्म और जाति पूछकर मारेगी तो पुलिस और साम्प्रदायिक तत्वों में क्या फर्क रह जाएगा?

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