गुजरात बनाने की धमकी दे कर मुस्लिम मोहल्लों पर टूट पड़ी नीतिश की पुलिस : रिहाई मंच




लखनऊ – बिहार नवादा से लौटकर रिहाई मंच ने कहा कि जब प्रतिनिधि मंडल नवादा के बड़ी दरगाह मोहल्ले में पहुंचा तो देखा कि 5 अप्रैल की घटना के बाद टूटे हुए दरवाजे, अलमारी और बक्से कई हफ्ते बाद भी उसी तरह बिखरे पड़े हुए हैं, लोग अब भी दहशत में हैं। लेकिन इतने दिनों बाद भी नीतिश कुमार के शासन का कोई देखने तक नहीं पहुंचा। जिस तरीके से पैंथर और बिहार पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने भागलपुर-गुजरात बना देने का नारा लगाते हुए न केवल पुरुषों को बल्कि महिलाओं और बच्चों पर भी बर्बरता पूर्वक हिंसा कर गुजरात और भागलपुर के दंगाईयों को भी मात दे दिया।
प्रतिनिधि मंडल में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, लेख़क पत्रकार शरद जायसवाल, पटना हाई कोर्ट अधिवक्ता अभिषेक आनंद, सामाजिक कार्यकर्ता गुंजन सिंह,समाज वैज्ञानिक डॉ राजकुमार, रिहाई मंच नेता लक्ष्मण प्रसाद और रिहाई मंच प्रवक्ता अनिल यादव शामिल रहे। प्रतिनिधि मंडल के साथ इंसाफ इंडिया के अध्यक्ष मुस्तकीम सिद्दकी के साथ नौशाद मलिक, सुल्तान कारी भी शामिल थे।
पहले से थी साजिश
रिहाई मंच नेताओं ने कहा कि 4 अप्रैल को कथित रामनवमी के पोस्टर फटने के बाद 2 बजे रात को यह सूचना कैसे फैलाई गई और बजरंग दल जैसे संगठनों के लोग कैसे वहां जमा हो गए। वहीं मामला शांत होने पर सुबह 6 बजे स्थानीय सांसद व अपनी साम्र्पदायिक टिप्पणियों से समाज को बांटने वाले केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में जिस तरह से पथराव, पुलिस द्वारा 14 राउंड फायर और दुकानों को जलाया गया उससे साबित होता है कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित साजिश थी।
वहीं इस घटना के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस बात को जब कहा कि रामनवमी के झंडे -पोस्टरों के नाम पर भाजपा और बजरंग दल जैसे संगठन व प्रशासन हिंसात्मक कार्रवाई कर रहे हैं ऐसे में वो इन पोस्टरों-झंडों की सुरक्षा के लिए लोगों को नियुक्त करें। इसके बाद 5 अप्रैल को नया पुल पर डीएम और एसपी की उपस्थित में बड़ी दरगाह, शरीफ कलोनी, इस्लामनगर, मुस्लिम रोड, सेखावत बाग, कुरैशी मोहल्ला, सदभावना चौक इलाको में दो बजे से 6 बजे तक आक्रमकता के साथ भागलपुर और गुजरात बना देने के नारे लगाते हुए पुलिस ने हमले किये, वो बताता है कि यह पूरी साम्र्पदायिक घटना पूर्व नियोजित थी जिसमें दंगाई की भूमिका स्वयं राज्य मशीनरी निभाने का काम कर रही थी।
एमएलसी को भी नहीं बख्शा
मंच ने कहा कि गुजरात में दंगाइयों ने एहसान जाफरी के घर पर हमला करके मार डाला लेकिन नवादा में तो बिहार पुलिस ने जदयू एमएलसी सलमान रागिब के घर पर और स्थानीय पार्षद के घर हमला किया। जो बताता है कि नितीश बाबू के सुशासन का क्या हाल है पिछले दिनों छपरा में राजद के मुस्लिम जिला अध्यक्ष की दुकान को सांप्रदायिक तत्वों जला डाला।
मंच ने पाया कि पांच नाबालिग लडकों मुहम्मद साजिद, आसिफ रजा, आरिफ रजा, नाजिश खान और फरहान अली कैफ को गिरफ्तार किया गया। जिसमें से पांचवी कक्षा के आरिफ रजा जो ज़मानत पे छूटे है से प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात हुई। आरिफ ने बताया कि उनको बाल सुधार गृह में न रखकर जेल में रखा गया था, अपने जिस्म पर की चोटों को दिखाते हुए उस दिन की बर्बर घटना पर वे रो पड़ते हैं।
80 वर्षीय बुजुर्ग महिला सकीना का सर मार कर फोड दिया गया उनका न तो एफआइआर दर्ज हुआ ना ही इलाज हुआ। वही तब्बसुम जैसे महिलाओं का जेवर और मोबाईल छिन लिया गया। तब्बसुम ने बताया कि इस पूरी घटना मे पुलिस बलों ने बहुत लूटपाट और तोड़फोड़ की। प्रतिनिधि मंडल ने पाया कि नवादा घटना में पुलिस जिस तरह से मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया वह हाशिमपुरा की याद दिलाता है।
नितीश कुमार का मुखौटा
नवादा में 2013 के बाद जिस तरह से साम्र्पदायिक हिंसा हुई उससे साफ हो गया है कि बिहार में गिरिराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा साम्र्पदायिकता की आग लगाने पर उतारू है और नीतिश सरकार उसको संरक्षण दे रही है। यूपी में सपा-बसपा ने आदित्यनाथ योगी को मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया ठीक उसी तरह नीतिश-लालू मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की धमकी देने वाले गिरिराज सिंह को ऐसा मौका देना चाहते हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने खुद को सेक्युलर कहने वाले नीतिश कुमार से इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि बिहार सरकार तत्काल दोषी पुलिस कर्मियों और केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करे। मंच जल्द ही इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट लायेगा।

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