जब रेप साबित करने में लगे थे 15 साल- बलात्कारियों को बचाने के लिये पुलिस और डॉक्टर ने बनाई थी झूठी रिपोर्ट




2002 में हुए बहुचर्चित बिल्किस बानो रेप केस में डॉक्टर और पुलिस की टीम ने दोषियों को बचाने के लिए झूठी जाँच रिपोर्ट दी थी कोर्ट में, दुष्कर्मियों को बचाने की इतनी कोशिसे की गयी की गुजरात हाइकोर्ट ने 2003 में मामला ही खारिज़ कर दिया।
तत्पश्चात ये केस गुजरात से बाहर चलाया गया और 15 साल के संघर्ष के बाद बिलकिस के दोषियों को उम्र कैद की सज़ा हुई एवं झूठी रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर और पुलिसकर्मी बेनकाब हुए। बलात्कार को साबित करने में 15 साल लगे बिलकिस को.. जबकि उसके परिवार की लाशें अदालत को नजर आ रही थी। कोर्ट को बहुत कुछ नजर आ रहा था किंतु दोषियों को सजा देने के लिए सबकुछ नाकाफी था।
बिजनोर वाला मामला भी पेचिदा बना दिया गया है। जबरदस्ती करते हुए फोटोग्राफ्स एवं घटना स्थल पे मौजूद गार्ड और एक यात्री की चश्मदीद गवाही देती वीड़ियो और उसके बाद आरोपी को थाने में मिली खास तवज्जोह कई प्रश्न खड़े करती है।
मिडिया का एक धड़ा अचानक से युवती को चरित्रहीन साबित करने पे तूल पड़ा जबाकी उसके चरित्र से बलात्कार या बलात्कार की कोशिस का क्या लेना देना??
ये पहली बार देखने को मिल रहा है कि बड़ी संख्या में लोग पीड़िता की बजाय दुष्कर्म के आरोपी के साथ खड़े है। पीड़िता पे तरह तरह की टोंट कसी जा रही है उसका चरित्रहनन किया जा रहा है।
मुझे युवती पीड़ित नजर आ रही है हर तरफ से.. वो पूर्व पति से पीड़ित, परिवार से पीड़ित, उस सिपाही से पीड़ित, मिडीया और पुलिस से पीड़ित.. बची खुची कसर सोशल मिडिया पे बैठे अक्ल के ठेकेदारों ने निकाल दी।
युवती सभी दिशाओं से पीड़ित.. दुष्कर्म के आरोपी के चेहरे पे चमक नजर आ रही है।

No comments

Need a News Portal, with all feature... Whatsapp me @ +91-9990089080
Powered by Blogger.