जयपुर जामा मस्जिद में जुमे की दिन आए लाखों नमाज़ियों के लिए हिन्दू करते हैं सभी इंतजाम




रहमतों और बरकतों का महीना रमजान चल रहा है। गुलाबी नगरी जयपुर में रमजान में जुमा की नमाज में भी अन्य स्थानों की तरह बड़ी संख्या में मुसलमान शामिल होते हैं।
एक ओर राजधानी में मुस्लिम भाई सामूहिक रूप से जुमा की नमाज़ अदा करते हैं तो दूसरी तरफ यहां हिंदू भाई उनकी सेवा में लगे रहते हैं। सवा सौ साल से जयपुर में जुमा की यह नमाज़ गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है।
राजधानी जयपुर में माहे रमज़ान में आध्यात्मिकता का दौर जारी है। यहाँ रमज़ान में जुमा की नमाज़ हो चुकी है और अब तीन बाकी हैं। गर्मी की शिद्द्त और हालात कितना भी मुश्किल क्यों न हों, लेकिन जोहरी मार्किट में जब मुस्लिम भाइयों के साथ हिंदू भाई छाया का प्रबंधन और वुज़ू का इन्तेजाम करने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं तो रोजेदारों का मनोबल और बढ़ जाता है।
गुलाबी शहर में पिछले सवा सौ साल पुरानी जोहरी मार्किट की जामा मस्जिद में राज्य में सबसे अधिक नमाज़ियों की संख्या वाली जुमा की नमाज अदा की जाती है।
माहे रमज़ान में नमाजियों की कतारें इतनी लंबी होती है कि उन्हें बाजार के रोड पर खड़े होकर नमाज़ अदा करनी पड़ती है। यहाँ सात से आठ लाख नमाज़ी एक साथ नमाज़ अदा करने के लिए पहुंचते हैं।
फिर सांगानेरी गेट से लेकर बड़ी चोपड़ तक और बड़े चोपड़ से लेकर चांदी की टकसाल तक या फिर त्रिपोली गेट से लेकर रामगंज तक, हर तरफ अल्लाह की बारगाह में लाखों रोज़ेदार एक साथ अल्लाह की बारगाह में सजदा करते हैं और गुनाहों की माफी मांगते हैं। राज्य में शांति, चैन आराम, विकास, राष्ट्रीय एकता और बेहतर मानसून की दुआ मांगते दिखते हैं।
यहां मुसलमानों की जो बड़ी संख्या में नमाज़ अदा होती है उसी हिसाब से सभी व्यवस्था भी की जाती है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पुलिस के हाथ में होती है तो जामा मस्जिद कमेटी भी इसके लिए विभिन्न ख़िदमतगारों को जिम्मेदारी देती है ताकि नमाजियों को आसानी हो सके।
भले ही पुलिस प्रशासन और जामा मस्जिद कमेटी की ओर से नमाज़ की व्यवस्था की पूरी कोशिश की जाए लेकिन जोहरी बाजार के व्यापारी मंडल और यहाँ मौजूद हिंदू व्यापारी लंबे समय से रमज़ान में जुमा की नमाज में अपनी तरफ से पूरी मदद करते आ रहे हैं।


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