AIMIM विधायक वारिस पठान के विरोध के बाद बैकफुट पर BJP, कहा, वंदे मातरम बोलना जरुरी नही




केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वंदे मातरम् गाना ही अपनी पसंद की बात है और जो लोग इसे गाने से इंकार कर रहे हैं उन्हें देशद्रोही नहीं करार दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग गाना चाहते हैं वे गा सकते हैं और जो गाना नहीं चाहते वे न गाएं। उन्होंने कहा कि अगर कोई जानबूझकर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित राष्ट्र गीत का विरोध करता है तो यह ‘‘सही नहीं है’’ और ‘‘देश के हित में नहीं है।’’उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधान परिषद् में शुक्रवार को वंदे मातरम् गाने को लेकर विवाद हो गया था, जहां बीजेपी विधायकों ने AIMIM विधायक वारिस पठान का इस लिए विरोध किया कि वह राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को आवश्यक बनाने की मांग का विरोध कर रहे थे। AIMIM विधायक के साथ साथ सपा विधायक अबू आजमी भी इस मुद्दे में कूद पड़े और वारिस पठान की मांग को जायज ठहराते हुए इसे बंद करने की मांग करने लगे जिसके बाद भाजपा विधायकों ने देशद्रोही बोलकर झड़प करने लगे. मीडिया के कैमरे के सामने भी भाजपा और वारिस पठान के बिच खूब झड़प हुई.
गौरतलब है की सूर्य नमस्कार के अनिवार्य करने जैसी बातों को लेकर भी AIMIM ने सरकार का विरोध किया था, उस वक्त भी भाजपा बैकफुट पर आ गई थी, और सरकार को बाकायदा बयान जारी करना पडा था कि सूर्य नमस्कार करना जरुरी नहीं है, सूर्य नमस्कार की जगह वो अल्ला की इबादत कर सकतें हैं. अब वंदे मातरम् पर भी AIMIM के नाम एक और सफलता जुड़ गया कि उनके विरोध के बाद मुस्लिम समुदाय में एक बार और भाजपा को बैकफुट पर लाया जा सका है.
इसके पहले महराष्ट्र विधानसभा में AIMIM विधायक वारिस पठान ने डंके की चोट में कहा था मेरे गले पर बन्दुक रख दो तो भी मैं वन्दे मातरम नहीं बोलूँगा. मुंबई से एआईएमआईएम विधायक वारिस पठान ने कहा कि अगर कोई उनकी कनपटी पर रिवॉल्वर रख देगा तो भी वह ‘वंदे मातरम’ नहीं गाएंगे, जबकि समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख और विधायक अबू आज़मी ने कहा कि अगर उन्हें देश से निकाल भी दिया जाए तो भी वह इसे नहीं गाएंगे. बीजेपी के वरिष्ठ विधायक राज पुरोहित की मांग के मद्देनजर यह प्रतिक्रियाएं आईं. पुरोहित ने उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि समूचे महाराष्ट्र के सभी स्कूलों और कॉलेजों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य बना देना चाहिए.
विधान भवन के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए विधानसभा में बीजेपी के मुख्य सचेतक पुरोहित ने कहा कि वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से मिलकर ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य बनाने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग करेंगे. पुरोहित की मांग पर दक्षिण मुंबई की बाइकुला सीट से विधायक पठान ने कहा कि लोगों पर एक खास विचारधारा नहीं थोपी जा सकती है.
उन्होंने कहा कि मैं वंदे मातरम नहीं गाऊंगा. मेरा मजहब और कानून भी मुझे इसे गाने की इजाजत नहीं देता है. अगर कोई मेरे सिर पर रिवॉल्वर रख दे तो भी मैं नहीं गाऊंगा. सदन में इस मांग का विरोध करुंगा. आज़मी ने आरोप लगाया कि बीजेपी आरएसएस के निर्देशों का पालन कर रही है जो आखिरकार समाज का ध्रुवीकरण करेगा.
उन्होंने कहा कि मैं इस्लाम का सच्चा अनुयायी हूं. वंदे मातरम गाना मेरे मजहब और संविधान के खिलाफ होगा. एक सच्चा मुसलमान इसे कभी नहीं गाएगा. अगर मुझे देश से निकाल दिया जाएगा तो भी मैं वंदे मातरम नहीं गाऊंगा. बहरहाल, पुरोहित की मांग का बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने समर्थन किया.
एआईएमआईएम और सपा की निंदा करते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता और परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने कहा कि वे लोग ‘गद्दार’ हैं. उन्होंने कहा कि उन लोगों को यह जानने की जरूरत है कि यह (वंदे मातरम) देशभक्ति गीत है जिसे स्वाधीनता संघर्ष के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों ने गाया था.
गौरतलब है कि अपने आदेश में मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने इस राष्ट्रीय गीत को तमिलनाडु के स्कूलों में हफ्ते में कम से कम दो बार गाना अनिवार्य बनाया था. हालांकि, अदालत ने यह भी कहा था कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को इसे गाने में दिक्कत है तो उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, बशर्ते कि ऐसा नहीं करने की उनके पास कोई वैध वजह हो.

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