जांच के नाम पर NIA ने उठाया आतिफ को ज़बरदस्ती करवाया साइन- मिडिया ने बताया आतंकी




"NIA द्वारा आतिफ और आसिफ की गिरफ्तारी और मिडिया का नया प्रोपगंडा"
NIA ने कानपुर से आतिफ़ और आसिफ़ इक़बाल को गिरफ़्तार किया है, मिडिया के मुताबिक ये लखनऊ सैफुल्लाह एनकाउंटर से जुड़ा मामला है,
सैफुल्लाह एंकाऊंटर के बाद एनआईए ने कानपुर स्थित आतिफ और आसिफ को परेशान करना शुरू किया था, पिछले दिनों रिहाई मंच के जरिए आतिफ के ब्यान के मुताबिक पहले एटीएस उन्हे अपने दफ्तर कानपुर में ले जाकर प्रताड़ित करती रही उसके बाद अपने लखनऊ हेड क्वाटर पर प्रताड़ित किया। वहां एनआईए की टीम भी आकर पूछताछ करती रही। बाद में समय-समय पर एनआईए के कार्यालय से फोन करके बुलाया जाता रहा और प्रताड़ित किया जाता रहा।
कल आतिफ के भाई आकिब ने फेसबुक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि एनआईए की टीम ने उनके घर छापा मारा है
खबरों के मुताबिक आतिफ़ को को उनके सामने हाजिर करने के बाद एनआईए के लोग पहले कनिष्क होटल ले गये जहाँ सैफ़ुल्लाह के चचेरे भाई आसिफ़ इक़बाल को भी लाया गया था। होटल में सबसे बहुत सारे काग़ज़ात पर जबरदस्ती दस्तख़त करवाए गये। बाद में आक़िब को छोड़ दिया गया और आतिफ़ व आसिफ़ इक़बाल को यह कह कर लखनऊ ले जाया गया कि आज ही उन्हें लखनऊ अदालत में पेश कर दिया जाएगा ।
और आतिफ को उनके सामने हाजिर करने की बात कर रहे थे, उसे भी साथ जाने कह रहे थे फिर उनके वालिद को साथ ले गए।
अब मिडिया द्वारा इस मामले को दुसरा रुख दिया जा रहा है, आतिफ़ के भाई आकिब को NIA ने इसकी लिखित सूचना दी है, जो आकिब ने एडवोकेट #असद_हयात_साहब को उपलब्ध कराई है
इसके अनुसार आतिफ़ को केस क्राइम नंबर RC 203/2017/NIA-LKW ps LKO u/s 121, 121 a, 124,124 a IPC and
16,18,23,36 UA(P) act 1967 के तहत 25 जुलाई को 4.16 pm पर चकेरी कानपुर के होटल कनिष्क से की गई है।
लेकिन एक अंग्रेजी अख़बार ने लिखा है कि ये गिरफ्तारी कश्मीर के आतंकियों को फण्ड उपलब्ध कराने के मामले में की गयी है, अगर ऐसा होता तो उस मामले का भी उल्लेख आकिब को दी गयी सूचना में होता , जो की नहीं है और उस केस के लखनऊ में दर्ज होने का कोई औचित्य नहीं है। अब ये समझ में नहीं आ रहा है कि मीडिया किस आधार पर कह रही है कि कानपुर से गिरफ्तार आतिफ़ और असिफ को कश्मीरी पृथकतावादियों के लिए फंड्स इकट्ठा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
एडवोकेट असद हयात साहब के मुताबिक जब आतिफ उनके पास अपने परीवार साथ आया था तो उसकी पत्नी 10 दिन की जच्चा थी, और फिर भी वो डरे सहमे उनके पास 5 किलोमीटर का सफर तय करके आए थे, करचोब की मज़दूरी का काम करने वाला आदमी जिस के बदन पर पुराने कपडे और दो वक़्त की रोज़ी रोटी कमाने की फिक्र हो वह कैसे आतंकियों के लिए फण्ड इकट्ठा करने वाला हो सकता है , आतिफ़ कह रहा था कि NIA झूठी गवाही देने का दवाब बना रही है जो वह नहीं देगा , उस ने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे पत्र और मीडिया को अपना दिया इंटरव्यू भी असद साहब को दिखाया था।
आज मीडिया की गुमराह करने वाली इस रिपार्ट से साबित हो गया कि कितना ज़्यादा ग़लत प्रोपगंडा मीडिया करती है।
किसी भी आदमी का झूठा अभियोजन किया जाना मानवाधिकार का उल्लंघन है, निष्पक्ष विवेचना होनी चाहिए । हर आरोपी को अंतिम अदालत तक अपने बचाव और कानूनी मदद का अधिकार है। तब तक किसी को मुजरिम ठहराने का अधिकार किसी को प्राप्त नहीं।
अशरफ़ हुसैन की क़सम से

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