युपी में 300 लोगों ने छोडा हिंदु धर्म,भाजपा समेत कई संगठन के लोग आनन-फानन पहुंचे




उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में धर्मांतरण को लेकर बवाल मचा हुआ है,अब तक भाजपा समेत कसी हिन्दू संगठने वहां पहुँच चुकी हैं
 भदोही जिले के कसिदहां दलित बस्ती के 300 लोगों के हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है। सोमवार से लेकर अबतक  को भाजपा जिलाध्यक्ष समेत कई संगठनों के पदाधिकारियों ने बस्ती में पहुंचकर लोगों को समझाया।
इस दौरान भाजपाजनों को बस्ती वालों का विरोध सहना पड़ा, हालांकि बस्ती के विकास कराने के लिए आश्वस्त किया गया। कसिदहां दलित बस्ती में बड़ी संख्या में लोगों के बौद्ध धर्म अपनाने की घटना से काशी प्रांत से लेकर लखनऊ तक फोन की घंटियां घनघनाने लगीं।
सोमवार को सुबह 10 बजे ही कसिदहां में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू धर्म रक्षा मंच और भाजपा के कई नेता पहुंच गए। बस्ती वालों ने मौके पर पहुंचे संगठन के लोगों को खरी खोटी सुनाई। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप मढ़ा। विरोध का सुर देख जिलाध्यक्ष ने पार्टी को सर्व समाज की हितैषी बताया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने ही दलित समाज के रामनाथ कोविंद को देश का राष्ट्रपति बनाया। बस्ती वालों का गुस्सा देख कहा कि हिंदू धर्म का ही हिस्सा बौद्ध धर्म है। उन्होंने दावा किया कि बस्ती में 16 हैंडपंप रिबोर कराने की संस्तुति सीडीओ ने दे दी है। प्रधानमंत्री आवास समेत अन्य विकास कार्य जल्द ही शुरू कराए जाएंगे।
भदोही में धर्मांतरण को लेकर सक्रिय मिशनरियों के खिलाफ हिंदू धर्म रक्षा मंच ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को पुलिस अधीक्षक को पत्रक सौंपकर ऐसे लोगों पर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि प्रार्थना सभा के बहाने लोगों को बरगलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी ऐसे लोगों पर कार्रवाई करें अन्यथा शासन से इसकी शिकायत की जाएगी।
हिंदू धर्म रक्षा मंच के संरक्षक आलोक जी ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि जिले में धर्मांतरण का कारोबार तेजी से फैल रहा है। विदेशी मिशनरियां गरीब लोगों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करा रही हैं।
ज्ञानपुर के भुड़की, तिवारीपुर, कसिदहां, माधोपुर, जंगीगंज, धनतुलसी, भमौरी, कलातुलसी, सुभाषनगर, बैरा, महराजगंज, पटखौली, चौरी और रोटहां क्षेत्रों में ऐसे लोग सक्रियता से कार्य कर रहे हैं।
भुड़की और जंगीगंज में अवैध चर्च और मिशनरी के एजेंटों के माध्यम से भूत प्रेत और प्रार्थना सभा के माध्यम से लोगों को धर्म बदलवाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने एसपी से मांग की कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
दिन: सोमवार, स्थान: कसिदहां दलित बस्ती। समय सुबह11 बजे। मौका था धर्मांतरण प्रकरण की जांच का। पुलिस और प्रशासन के अफसरों को देख बस्ती के लोग पहले तो सहमे, लेकिन बाद में अफसरों ने उनकी समस्याएं सुनी और प्रकरण को लेकर सवाल जवाब करने लगे।
दूसरी तरफ लेखपाल बस्ती की महिलाओं को ढूंढ-ढूंढकर अंगूठा लगवाने में ही व्यस्त दिखे। कसिदहां गांव में सोमवार को पहुंची अमर उजाला टीम ने सादे कागज पर दस्तखत कर रहीं महिलाओं से बात की तो उनका कहना था कि सादे कागज पर उनका दस्तखत क्यों कराया जा रहा है, पता नहीं।
हमें लगता है अब लोगों को आवास और हैंडपंप मिलेगा। बस्ती की ज्यादातर महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं थी, जिससे वह प्रकरण को लेकर अनजान थीं। लेखपाल साहब के अंगूठा लगवाने की घटना को लेकर तमाम चर्चाएं रहीं।
तकरीबन ढाई घंटे तक गांव में जमे रहे अधिकारियों ने गांव वालों से बातचीत की। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव में विकास कार्य न होने और कई तरह से उपेक्षित रहने की बात कही। इस पर अधिकारियों ने उनकी बस्ती के विकास का भरोसा भी दिलाया। कहा कि निश्चिंत रहें, विकास के सभी कार्य होंगे।
कसिदहां गांव की दलित बस्ती में बड़ी तादाद में लोगों के हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने की बात सामने आने के बाद सोमवार को प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। जिलाधिकारी ने फौरी तौर पर अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम बनाकर मामले की जांच के निर्देश दे दिए। आनन-फानन कसिदहां पहुंचे अधिकारी मामले को दूसरी दिशा देने में जुटे दिखे। बस्ती के कुछ लोगों का आरोप था कि उनसे सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया गया।
गोपीगंज क्षेत्र के कसिदहां गांव की दलित बस्ती में दिवाली से पूर्व बनारस के सारनाथ से आए कुछ बौद्ध धर्मावलंबियों की मौजूदगी में बस्ती के लोगों ने बौद्ध धर्म में अपनी निष्ठा जताई थी। इस दौरान एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बस्ती के लोगों ने बौद्ध धर्म के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया और डॉ. भीमराव अंबेडकर के वादों को पूरा करने का संकल्प दोहराया।
यह खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद सोमवार को जिलाधिकारी विशाख जी ने एडीएम न्यायिक बच्चीलाल, एसडीएम ज्ञानपुर सुनील कुमार और जिला समाज कल्याण अधिकारी आरके सिंह की तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर मामले की जांच का निर्देश दिया। सोमवार को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की टीम कसिदहां गांव में पहुंच गई। इस दौरान बस्ती के लोगों ने उपेक्षा और विकास न होने की बात रखी।
कहा कि वे पीड़ित हैं। इस दौरान अधिकारियों को बस्ती के लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने बस्ती के लोगों से लिखवाकर ले लिया कि वे लोग हाल के दिनों में नहीं बल्कि पिछले कई सालों से बौद्ध धर्म के अनुयायी बने हैं। प्रकरण की जांच के बाद जिलाधिकारी विशाख जी ने कहा कि कसिदहां में धर्म परिवर्तन हाल के दिनों में नहीं हुआ है। बस्ती के लोग पिछले कई साल से बौद्ध धर्म अपनाए हुए हैं।


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