अमन का पैग़ाम देती है अज़ान, पूरी दुनिया की सलामती के लिये की जाती है दुआ- राजीव शर्मा




मेरे गांव कोलसिया में घर से कुछ ही दूरी पर मंदिर है। मैं उसकी आरती सुनता हुआ बड़ा हुआ हूं। जब शाम को पूजा का वक्त होता और पुजारीजी आरती करते तो उनकी आवाज पूरे गांव में सुनाई देती। उस समय मैं मेरी दादी मां की गोद में बैठ जाता और उन्हीं के साथ शब्दों को दोहराता।
एक दिन मैं मंदिर में गया तो वहां जलता हुआ दीया देखा। उसके बाद तो मैं कई बार वहां गया। मंदिर के पीछे ही श्मशान है। मैंने कई बार वहां जलती चिताएं देखीं।
मंदिर के दीए और चिता की आग में बहुत ज्यादा फर्क नहीं होता। हम रोज कम से कम एक बार दीए की इस आग को देखकर अपने हश्र को याद करते हैं। आग बहुत दूर से दिखाई देती है, आरती बहुत दूर से भी सुनाई देती है। जब यह दूर रेत के टीलों में गूंजती है तो बहुत खूबसूरत लगती है।
दुनिया में घर के अलावा एक और जगह है जहां मैं कभी भी जा सकता हूं। यूं कहिए कि वहां मैं घर से ज्यादा सुकून महसूस करता हूं। वह जगह है मेरी छोटी बहन वंदना का ससुराल। वह मेरे गांव से कुछ ही दूरी पर स्थित है। उस गांव का नाम बाय है जो नवलगढ़ तहसील में स्थित है।
बाय में एक मस्जिद है। जब कभी मैंने वहां से अजान सुनी तो वह दिल को बहुत भली लगी। उसके शब्द सीधे आपके दिल को छूते हैं। अगर अजान को बहुत दूर से सुनते हैं तो भी इसके शब्दों का असर कम नहीं होता, बल्कि बढ़ ही जाता है।
एक दिन मैंने उन शब्दों का मतलब जानना चाहा। मैं यह जानकर चकित था कि अज़ान में किसी भी धर्म का कहीं नाम नहीं लिया जाता, बल्कि इसके जरिए संपूर्ण विश्व के लिए शांति की प्रार्थना की जाती है। यहां एक शब्द पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है। वह है – आओ कामयाबी की ओर।
सवाल है- किस देश, समाज या घर के लोग कामयाब होंगे? बेशक जहां शांति होगी, लोग मिलकर रहेंगे, मेहनत करेंगे, एक-दूसरे की इज्जत करेंगे। ऐसे लोगों को कामयाब होने से कौन रोक सकता है? कोई नहीं, क्योंकि खुदा को ऐसे लोग बहुत पसंद हैं जो उसकी धरती को खूबसूरत बनाते हैं। जहां लोग एक-दूसरे के कपड़े फाड़ने को आमादा हों, वे क्या खाक तरक्की करेंगे?
आपने अभी तक अरबी में ही अज़ान के शब्द सुने होंगे। बहुत लोग इसका मतलब नहीं जानते। मैंने पहली बार मारवाड़ी में इसका अनुवाद किया है। जो हिंदी जानता है, वह इसे आसानी से समझ सकता है। मैंने छोटी-सी कोशिश की है, एक बार आप भी पढ़िए।
मारवाड़ी में समझिए क्या है अज़ान के शब्दों का मतलब
रब सै सूं बडो है।
मैं गवाह हूं कि रब कै सिवा कोई और पूजण लायक (खुदा) कोनी।
मैं गवाह हूं कि मुहम्मदजी रब का रसूल हीं।
आओ पूजा कानी (पूजा करण कले)।
आओ कामयाबी कानी (कामयाबी हासिल करण कले)।
(पूजा नींद सूं घणी चोखी है – अयां फज्र की टेम बोल्यो जावै)
रब सै सूं बडो है।
रब कै सिवा कोई और पूजण लायक (खुदा) कोनी।
राजीव शर्मा ‘कौलसिया’(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)


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