रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिये तुर्की की एक और शानदार पहल




नई दिल्ली  म्यांमार के रखाइन प्रांत में म्यांमार की सेना और बोद्ध चरमपंथियों द्वारा किये गये रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार के कारण वहां से दुनिया भर में कोई सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ने वाले रोहिंग्या की मदद के लिये तुर्की ने एक बार फिर अपनी दरियादिली दिखाई है। वैसे तो तुर्की ने पहले भी रोहिंग्या मुसलमानों की मदद की है लेकिन इस बार तुर्की ने रोहिंग्या मुसलमानों के छात्रों को स्कॉलरशिप देने का एलान किया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए तुर्की के डिप्टी पीएम हकान काव्यूसोगलू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि हमारा (तुर्की) देश 53 रोहिंग्या मुसलमानों के छात्रों को यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप देगा। उन्होंने बताया कि रोहिंग्या छात्र अब कम्यूनिकेशन, कानून, राजनीति और मानवाधिकार के बारे में तुर्किश यूनिवर्सिटी में पढ़ेंगे।
डिप्टी पीएम ने बताया कि कि फिलहाल में भी तुर्किश यूनिवर्सिटी में कई रोहिंग्या छात्र पढ़ रहे हैं। काव्यूसोगलू ने रोहिंग्याओं को खाना और स्वास्थ संबंधी सुविधाओं को देने की पुष्टि भी कर दी है। उन्होंने कहा कि वे शरणार्थी कैंपों में मोबाइल हेल्थ क्लीनिक खोलेंगे।
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी रखाइन के छात्र तुर्कि यूनिवर्सिटी में संचार, कानून, राजनीति और मानवाधिकार की पढ़ाई करते हैं, लेकिन वहां के मौजूदा हालात के कारण वे परेशानियों का सामना कर रहे हैं। हकान ने कहा, रोहिंग्या मुसलमानों को तुर्की सपोर्ट करता रहेगा।
गौरतलब है कि अगस्त में शुरु हुई इस हिंसा में एक हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या की जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार की इस कार्रावाई को लेकर उसकी सख्त लफ्जों में आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था ने तो यहां तक कह दिया है कि म्यांमार की सरकार मानवता के खिलाफ अपराधी है लिहाजा म्यांमार के हथियारों की आपूर्ती पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिये।
इतना ही दुनिया की मशहूर यूनीवर्सिटी ऑक्फोर्ड ने भी म्यांमार की की पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान में म्यांमार की विदेश मंत्री आंग सांग सूची की तस्वीर को भी हटा लिया है। यूनिवर्सिटी ने उनकी यह तस्वीर उन्हें शान्ति का नोबेल मिलने के बाद लगाई थी, लेकिन अब म्यांमार में हुई रोहिंग्या मुसलमानों की हत्याओं के मद्देनजर यूनीवर्सिटी ने उस तस्वीर को हटा लिया है। साथ ही उनसे फ्रीडम ऑफ ऑक्सफोर्ड आवार्ड भी यह कहते हुए वापस ले लिया है कि वे इसकी हकदार नही हैं।

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