मायावती ने दी चेतावनी, कहा अपने करोड़ों समर्थकों के साथ छोड़ दूंगी हिन्दू धर्म




आजमगढ़. बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को आजमगढ़ में एक बड़ी रैली की। रैली में उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि वो धर्म परिवर्तन कर लेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपने करोड़ों समर्थकों के साथ धर्म परिवर्तन कर लेंगी। वह शंकराचार्यों पर भी नाराज दिखीं और कहा कि वो लोग धर्म के ठेकेदार नहीं। सीएम योगी आदित्यनाथ के बारे में कहा कि उन्हें पूजा-पाठ से फुरसत ही नहीं कि विकास करें। दावा किया कि शब्बीरपुर में जातीय संघर्ष के बहाने बीजेपी उनकी हत्या कराना चाहती थी। पूरे संबोधन में वह भाजपा और आरएसएस पर जमकर बरसीं, साथ में कांग्रेस पर भी परंपरागत रूप से हमला किया। बड़ी बात यह रही कि वह इस दौरान भतीजा यानि अखिलेश यादव पर नरम दिखीं।

आजमगढ़ के रानी की सराय चेकपोस्ट स्थित मैदान में बसपा की ओर से आजमगढ़, वाराणसी और गोरखपुर मंडल के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया था। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर अपने पुराने तिलक तराजू और तलवार वाले ढर्रे पर लौटती दिखीं। कहा कि शंकराचार्य और धर्म के ठेकेदार नहीं सुधरे तो वो अपने करोड़ों समर्थकों के साथ धर्म परिवर्तन कर लेंगी, उन्होंने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने की मंच से चेतावनी दी। कहा कि डा. अंबेडकर ने 35 साल पहले बौद्ध धर्म अपनाया था। उन्होंने कहा था कि मैं हिंदू धर्म में पैदा हुआ यह मेरे बस में नहीं था लेकिन मैं हिंदू धर्म में न मरू यह मेंरे बस में है। डा. अंबेडकर हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं थे लेकिन इस धर्म में फैले ऊंच नीच, कुरीतियों से खिन्न थे।

मायावती ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए उसे जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता से घिरी पार्टी बताया। कहा कि भाजपा सरकार आरएसएस के पूजीवादी एजेंडे को लागू कर अपनी सांप्रदायिक सोच आवाम पर थोप रही है। इस सरकार में मजदूर, गरीब, और पिछड़ों व खासतौर से दलितों का उत्पीडन किया जा रहा है। जातिवादी एजेंडे को ध्यान में रखकर पहले हैदराबाद में रोहित वेमुला फिर गुजरात का उना कांड और अब सहरनपुर कांड कराया गया।

मायावती ने दावा किया कि सहारनपुर के शब्बीरपुर में जुलूस के मामूली विवाद को राजपूत और दलितों के बीच जातीय हिंसा का रूप दिया गया। दलितों के 60 से 70 घर जला दिये गये, महिलाओं का खुलेआम उत्पीड़न किया गया। इसमें दलितों के एक संगठन को भी मिला लिया गया। जब हमने इसका पर्दाफाश किया तो कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गयी। उन्होंने कहा कि शब्बीरपुर कांड सोची समझी साजिश का परिणाम है। बीजेपी ने यह साजिश इसलिए रची ताकि वह मेरी हत्या करा सके। बीजेपी को पता था कि मयावती शब्बीरपुर जाकर दलितों का दर्द बांटेंगी। उस समय हिंसा में दलितों के साथ उनके नेता का भी काम तमाम कर दिया जायेगा। पर मैंने अपने सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय के एजेंडे पर काम किया और उनकी साजिश नाकाम हो गयी।

कहा कि इसी तरह मुझे राज्यसभा में दलित उत्पीड़न का मुद्दा नहीं उठाने दिया गया तो वहां से मैंने इस्तीफा दे दिया। मोदी सरकार पर आरक्षण छीनने का आरोप लगाया। बोलीं कि प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की व्यवस्था किये बिना ही प्रमुख संस्थाओं के निजीकरण का प्रयास हो रहा है। अनुच्छेद 340 के तहत अन्य पिछड़ों को आरक्षण व अन्य सुविधाओं का ममाला भी अंबेडकर ने उठाया था।

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