गुजरातः विजयदशमी के मौके पर बड़ी संख्या में दलितों ने छोड़ा हिन्दू धर्म




अहमदाबाद- एक तरफ हिन्दुवादी संगठनों द्वारा लव जिहाज और घर वापसी जैसे शिगूफे छोड़कर देश के माहौल को सांप्रदायिक बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है, तो दूसरी तरफ हिन्दू धर्म छोड़कर कोई और दूसरा धर्म अपनाने वाले दलितों पर को रोका नहीं जा रहा है। ताजा मामला गुजरात का है जहां बड़ी संख्या में दलितो ने हिन्दू धर्म का त्याग कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अहमदाबाद और वड़ोदरा में विजयदशमी के मौके पर बड़ी संख्या में दलितों ने बौद्ध धर्म की अहिंसा की शिक्षा से प्रभावित होकर हिन्दू धर्म का त्याग कर दिया बोद्ध धर्म अपना लिया। बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन के इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाली कमिटी के सचिव रमेश बनकर ने बताया कि कि 50 महिलाओं के साथ साथ सैंकड़ो लोगो ने बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण की है।  गुजरात में बौद्धों धर्म का प्रचार कर रही गुजरात बुद्धिस्ट अकादमी ने ये कार्यक्रम आयोजित किया था.
उन्होंने कहा की कुशीनगर के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा इन दलितों को दिया दीक्षा ज्ञान गया है. आपकी जानकारी के लिये बता दें कि कुशीनगर वही ज़गह है जहां लार्ड बुद्धा ने अपने शरीर का त्याग कर प्रिनिर्वना ग्रहण किया था. उन्होंने बताया कि अहमदाबाद के अलावा बड़ोदरा में भी लगभह सौ दलितों ने बौद्ध धर्म की शिक्षा ली,उनके मुताबिक पोरबंदर के एक भिक्षु परगना रत्ना को बौद्ध धर्म की शिक्षा दलितों को दिलाई.
धर्मांतरण के कार्यक्रम के आयोजक मधूसूधन रोहित ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे कोई संगठन नही था करीब सौ दलितों ने यहां स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है. वे बहुजन समाज पार्टी के जोनल को-आरडीनेटर भी है. मधूसूधन ने कहा कि बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की याद में हमने उनकी संकल्प भूमि में ये कार्यक्रम को किया है.
गुजरात में बसपा के इस नेता ने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर ने 1956 में नागपुर में लाखो दलितों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई थी जिसको अशोक विजय दशमी के नाम से जाना जाता है। क्योंकि इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया था. गौरतलब है कि गुजरात में इससे पहले भी दलितों ने हिन्दू धर्म त्याग कर सामूहिक रूप से बौद्ध धर्म अपनाया था।

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