जो लोग टीपू को क्रूर और हत्यारा बताते हैं, दरअसल वो लोग अंग्रेजों के पिट्ठू रहे हैंः सौरभ बाजपेयी




नई दिल्ली – टीपू सुल्तान एक एसा बादशाह थे जिनके जिंदा रहते अंग्रेज भारत में अपना झंडा नहीं फहरा पाये, टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के साथा चार लड़ाई लड़ीं और आखिरकार वे लड़ते लड़ते अपने वतन के लिये शहीद हो गये। लेकिन अब टीपू सुल्तान को लेकर बहस छिड़ी हुई है। तथाकथित राष्ट्रवादियों ने अंग्रेजों से लोहा लेने वाले टीपू सुल्तान को भी विवादित बनाने की ठान ली है।
हाल ही में केन्द्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने टीपू सुल्तान को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी जिसके बाद टीपू सुल्तान को लेकर विवाद हो  रहा है। दुनिया के इतिहास से अलग ‘अपना इतिहास’ थोपने वाला आरएसएस भी इस विवाद में कूद पड़ा है। आरएसएस के नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि टीपू सुल्तान ने चार लाख हिन्दुओं का धर्मांतरण कराया था।
लेकिन इस सबके बरअक्स देश के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बीते मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि टीपू सुल्तान अंग्रेजों से हीरो की तरह लड़े और लड़ते लड़ते शहीद हो गये, राष्ट्रपति ने कहा कि टीपू सुल्तान ने ही रॉकेट और मिसाईल इजाद की थीं।
उधर राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट के संयोजक सौरभ बाजपेयी ने कहा है कि जो लोग टीपू को क्रूर ब्रह्म हत्यारा बता रहे हैं वो अंग्रेजों के पिट्ठू साम्राज्यवादी इतिहासकारों के हाथों में खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं कभी औरंगजेब के बचाव में खड़ा नहीं होता. वजह यह कि कुल मिलाकर उसने अकबर की सुलह-ए-कुल की नीति को नुकसान पहुंचाया. भले ही उसके उमरा में हिन्दुओं की सबसे ज्यादा तादात उसके ही समय में हो; भले ही व्यक्तिगत जीवन में वो कितना ही सादगीपसंद क्यों न रहा हो.
सौरभ बाजपेयी ने कहा कि मेरा आदर्श अकबर है जिसके लिए मैं दिल के भीतरी कोर तक आदर का भाव रखता हूँ. आधुनिक भारत में जिन लोगों के लिए मेरे मन में गहन श्रद्धा उमड़ती है उनमें से एक टीपू सुल्तान हैं. जो लोग टीपू को क्रूर ब्रह्म हत्यारा बता रहे हैं वो अंग्रेजों के पिट्ठू साम्राज्यवादी इतिहासकारों के हाथों में खेल रहे हैं. वैसे इसमें नयी बात क्या है, ये आरएसएस के लोग तो अंग्रेजों के ही मानसपुत्र हैं.

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