एकता सम्मेलन में बोले महमुद मदनी ‘यह देश हमारा चमन है अगर किसी ने इसे उजाड़ने की कोशिश की तो....




नई दिल्ली – जमियत उलमा हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने दिल्ली में संपन्न हुए जमीतय उलमा ए हिन्द के अमन एकता सम्मेलन में एक घोषणा पत्र पेश किया, इस घोषणापत्र को प्रस्तुत करते हुए विशेष रूप से शान्ति, प्रेम और भाई चारे को बढावा देने का प्रण किया। मौलाना मदनी ने स्टेज पर मौजूद सभी धर्मों के नेताओं की तरफ संकेत करते हुए कहा कि आज यहां देवबन्द भी मौजूद है और ऋषिकेश भी, यह साबित करता है कि इस देश की बहुसंख्या शान्ति प्रियता पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई हमारे चमन को उजाडने की कोशिश करेगा तो इस देश की बहुसंख्या एसे लोगों के इलाज करने की ताकत रखती है। उन्होंने कहा कि मैं इन तमाम हजरात के सामने यह कहना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान के मुसलमानों को सब से बडी अगर कोई जरूरत है तो हिन्दू सिक्ख इसाई और पारसी भाईयों की मोहब्बत है.
लोगों की गालियां खाकर भी समाज सेवा में लगी है जमीयत
जमीयत उलमा ए हिन्द के इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए परर्माथ निकेतन, ऋषिकेश के नेतृत्वकारी स्वामी चेदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि आज हम यहां इसलिए इकट्ठे हुए हैं ताकि पूरी दुनिया को पैगाम दिया जाए कि हम सब एक हैं और हमारा देश शांति और व्यवस्था में सबसे आगे है।
उन्होंने जमीयत उलमा ए हिन्द के इस आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा कि यह वह संगठन है जो सौ साल से गालियां खाकर भी लोगों को गले लगाने का काम करती है। स्वामी चेदानन्द ने आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ने की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोगों के गलत कामों के लिये इस्लाम जैसे धुरंधर शांतिपूर्ण धर्म को बदनाम नहीं किया जा सकता उन्होंने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया की सारी मखलूक को खुदा का एक कुन्बा करार दिया है। सारे इंसानों को एक दूसरे के साथ षांति व भाईचारे के साथ रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज का यह जलसा दिलों को जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने इस मौके पर एक नन्हें पौधे को लगाने पर जोर दिया।
जत्थेदार अकाल तख्त, अमृतसर के जिम्मेदार मुख्य सिंह साहब ज्ञानी गुरबचन सिंह जी ने अपने संबोधन में कहा कि सारे धर्म शांति भाईचारे की एक शिक्षा पर सहमत हैं और सारे धर्मों का आधार सिर्फ एक खुदा पर है। उन्होंने अपने पैगाम में जमीयत उलमा ए हिन्द के इस कदम की तारीफ की और कहा कि तूफान में प्रेम का दीपक जलाना ही मूल बहादुरी का काम है।
सरग्रोबर हमेशानन्दचार्य स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि नफरत की शिक्षा देने वाले हर धर्म के दुश्मन हैं, उन्ही किसी धर्म से न जोड़ा जाए बल्कि मतभेद भुलाकर संयुक्त रूप से समाधान किया जाए। स्वामी मित्रानंन्द जी, आचार्य, चिन्मया मिशन चेन्नई ने कहा कि आज का यह सम्मलेन पैगाम देता है कि धर्म हरगिज आपस में लड़ने-झगड़ने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम की तस्वीर जब विश्व के सामने जाएगी, तो उसके जरिये ये पैगाम भी जाएगा कि भारत की जमीन लोगों को जोड़ने का काम करती है।


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