अयोध्या के ही संत राममूर्ति निर्मान के विरोध में, नहीं चाहते वहां मूर्ति का निर्माण हो



उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में सरयू तट पर भगवान राम की सौ मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी कर रही है लेकिन अयोध्या के संत इसके विरोध में आ गए हैं.
संतों का कहना है कि प्रतिमा की ऊंचाई का सरकार रिकॉर्ड तो बना सकती है लेकिन न तो ये शास्त्र सम्मत होगा और न ही इससे प्रतिमा का सम्मान हो सकेगा.
राम जन्म भूमि न्यास के महंत आचार्य सत्येंद्र दास ने बीबीसी को बताया कि भगवान राम की प्रतिमा खुले में स्थापित नहीं की जा सकती.
वो कहते हैं, “प्रतिमा बिना प्राण प्रतिष्ठा के स्थापित करने का कोई औचित्य नहीं है. भगवान राम की प्रतिमा या तो मंदिर के भीतर स्थापित हो या फिर प्रतिमा के ऊपर छतरी भी बनाई जाए. दूसरे, इतनी ऊंची प्रतिमा को रोज़ स्नान कराना और विधिवत पूजा करना भी आसान नहीं है. ऐसी स्थिति में भगवान राम की उस प्रतिमा का ही नहीं बल्कि उनका भी अनादर होगा.”
महंत सत्येंद्र दास सवाल उठाते हैं कि सरकार को कोशिश ये करनी चाहिए कि वो भगवान राम की जन्मभूमि में मंदिर-मस्जिद विवाद को सुलझाकर मंदिर भी बनाए और फिर उनकी प्रतिमा भी स्थापित करे.
वो कहते हैं, “सरकार का कहना है कि इसके माध्यम से वो बताना चाहती है कि दूर से ही लोग जान जाएं कि ये अयोध्या है और भगवान राम की जन्मभूमि है. आख़िर किसे नहीं पता है कि अयोध्या और भगवान राम का क्या संबंध है?”
महंत सत्येंद्र दास सीधे तौर पर कहते हैं कि सरकार प्रतिमा की स्थापना का शिगूफ़ा छोड़कर सिर्फ़ राजनीति कर रही है क्योंकि उसे पता है कि इससे वो लोगों का ध्यान आकर्षित कर पाएगी कि ये सरकार भगवान राम को लेकर कितनी संजीदा है.
वो कहते हैं कि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है, सरकार राम मंदिर मामले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसा करने की कोशिश कर रही है.
महंत सत्येंद्र दास जैसी राय अयोध्या के दूसरे साधु-संतों की भी है. दिगंबर अखाड़े के महंत आचार्य सुरेश दास भी प्रतिमा की स्थापना को शास्त्र सम्मत नहीं मानते. उनका कहना है, “अन्य देवताओं की प्रतिमा तो खुले में स्थापित हो सकती है लेकिन भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, उनकी प्रतिमा मंदिर के भीतर ही स्थापित होनी चाहिए.”



No comments

Need a News Portal, with all feature... Whatsapp me @ +91-9990089080
Powered by Blogger.