शुक्रिया नांदेड़ वासियों- असदउद्दीन ओवैसी को नकारने के लिये




तुम्हारा “सेक्युलरिज्म” जीत गया, MIM का सेक्युलरिज़्म हार गया ।
हां , जिस सेकुलरिज्म ने RSS को पाल पोस कर बड़ा किया वो जीत गया,
जिस सेक्युलरिज़्म ने हर शहर में मुसलमानों को झुग्गियों में समेट कर रख दिया वो जीत गया,
जिस सेक्युलरिज़्म ने मुसलमानों को पढ़ाई से लेकर नोकरियों तक सबसे पीछे कर दिया वो जीत गया,
जिस सेक्युलरिज़्म ने सिर्फ कश्मीरी पंडितो का खयाल रखा , उन्हें हर तरह से मुआवजा दिया, और मुसलमानों के खिलाफ हुए दंगो में मुसलामानों को आज तक मुआवजा ना दिला सका वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जिसने स्टेट एजेंसियों का इस्तेमाल करके सिर्फ “मुसलमान ही आतंकवादी होता है, RSS और दूसरे लोग जो आतंक फैलाते है वो आतंकवादी नही” ऐसी सोच को आम किया है वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जिसने ने पार्टीशन का जिम्मेदार जिन्ना को नकारनेवाले भारतिय मुसलमानो के ठहराकर अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जिस ने आदर्श जैसे घोटाले किये ,जिसने मुसलमानो के हक़ की वक़्फ़ की जमीन पर अम्बानी का घर बनवा दिया, और कई सारी वक़्फ़ की जायदादें आपस मे बांट कर खाली , वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जिस सेक्युलरिज़्म ने मुसलमानो के हालात के उपर कई रिपोर्ट तो बनवाई पर उसे लागू कभी नही किया वो जीत गया,
जिस सेकुलरिज्म ने हज़ारो दंगों में गुनाहगारो को सज़ा नही दिलवाई बलकी , हारने के डर से चुप रहे वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जो सेकुलरिज्म, तुम्हे वंदे मातरम न बोलने पर महाराष्ट्र की विधानसभा में मुसलमानो को निष्काषित करने को कहता है वो सेकुलरिज्म जीत गया,
जो सेकुलरिज्म , BJP के सत्ता के पहले शिकार मोहसिन शेख, पुणे के हक़ में सिर्फ हिंदुत्ववादी लोगो के वोट ना चले जाए इस लिए चुप रहता है , वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जो सेकुलरिज्म मदरसों को RSS के शिशु मन्दिर जैसा बताता है वो सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जो सेक्युलरिज़्म अपने ही सांसद अहसान जाफरी गुजरात को इंसाफ न दिला सका, वो सेक्युलरिज़्म जीत गया….
और हां MIM का सेक्युलरिज़्म हार गया, हा हमारे संविधान वाला सेक्युलरिज़्म हार गया,
जो किसी भी पिछड़े तबकों को उन का हक़ दिलाने की बात करता है, जो तुम्हारे हर मुद्दे पर सड़क से संसद तक आवाज उठाता है,
जो तुम्हे रिजर्वेशन मिले, तुम्हारे इलाकों में भी साफ़ सफाई रहे, तुम्हारे इलाकों में स्कूल बने, तुम्हे स्कॉलरशिप मिले, सच्चर कमिटी से लेकर कुंडू कमिटी तक जितनी भी रिपोर्ट्स हुई उनको इम्पलीमेंट करने की बात करता है, जो तुम्हारे हमारे जज़्बात दुनियाके सामने रखता है वो हार गया,
जो बर्मा से लेकर फलीस्तीन के मज़लूमो के उपर तुम्हारा नज़रिया मीडिया से लेकर संसद तक मे रखता है वो सेक्युलरिज़्म हार गया,
जो कहता है कि मेरे इस्लाम पर चलने की इजाजत मुझे संविधान देता है, और हम किसी भी हाल में इस्लाम या संविधान के खिलाफ वाले जुमलो(वंदे मातरम) को नही बोलेंगे वो सेक्युलरिज़्म हार गया,
जो अपना पुणे या सोलापुर में कोई वजूद न होते हुए भी मोहसिन शेख से लेकर तमाम हिंदुत्ववादियों के शिकार मज़लूमो के इंसाफ के लिए खड़ा रहा, वो सेक्युलरिज़्म हार गया,
जो अहसान जाफरी से इंसाफ की गुहार संसद में हमेशा उठाता रहा वो सेक्युलरिज़्म हार गया,
जो अपना वजूद किसी और स्टेट्स में न होते हुए भी, तुम्हारे लिए अपने पर्सनल प्रॉपर्टी से आसाम, बिहार बाढ़ से लेकर उत्तराखंड बाढ़ और फलीस्तीन के मुसलमानो के लिए तक इमदाद भेजता हो वो सेक्युलरिज़्म हार गया….
हां पैसावाला सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जो सिर्फ कुछ पैसों की खातिर अपने हक़ की आवाज उठाने वाले मुसलमानो को कट्टर या कम्युनल कहता हो उस शायर का सेक्युलरिज़्म जीत गया,
जो शायरी के नाम पर मुसलमानों को कांग्रेस जैसी दोगली पार्टियों के पैरों में घुंगरू की तरह बांधना चाहता है,
जो 2 4 लोगों को लेकर सारे मुसलमानो को गाली देनेवाला बताता है ,
जो “जय श्री राम” कहकर बाबरी मस्जिद गिराने वालो को और दंगे कराने वालो को और “अल्लाह हु अकबर” कहने वालों को एक जैसा बताता है,
जो आज़ादी के दौर में मुसलमानों को फ़र्ज़ी सेक्युलर पार्टियों का गुलाम बनाये रखना चाहता है,
जो सेक्युलरिज़्म बचाने के नाम पर सिर्फ कांग्रेस जैसी दोगली पार्टियों को बचाना चाहता है ,
उस शायरका सेक्युलरिज़्म जीत गया,
तय्यार रहिये ,
आगे होने वाले तुम्हारे खिलाफ़ दंगो के लिए,
क्योंकि ना कभी कांग्रेस जैसी पार्टिया RSS के खिलाफ कुछ करेंगी ,
नाही ये उन्हें उभरने से रोक पाएंगे,
10 साल कांग्रेस फिर 5 साल बीजेपी ,
और मरते रहो इन्ही के कदमो के नीचे,
क्योंकि ,हमें अपने आप पे भरोसा नही है,
हम हमेशा यही चाहते है कि हमारी आवाज कोई और उठाये ,
हम कहते तो है कि हम सिर्फ अल्लाह से डरते है,
पर हम अल्लाह से नही डरते ,हम BJP से डरते है,
इसलिए हम इंसाफ के हक़ में खड़े रहने वाले पार्टियों को भी सिर्फ मुसलमान नाम होने के वजह से नकार देते है,
हम मिसाल तो देते है 313 कि,
पर सिर्फ 15 % है इसलिए हमारा नाइंसाफी के खिलाफ बोलना सही नहीं ये सोचकर चुप रहते है,
अब बांध लिए है फ़र्ज़ी सेक्युलरों के घुंगरू तो बांधे ही रहो,
तुम्हारा मुस्तक़बिल तुमने खुद चुना है।
(किसी भी कौम के हालात तब तक नहीं सुधरते जब तक,
वो खुद हालात नही बदलना चाहते)
शबनम ख़ान की क़लम से 

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