गुजरात विधानसभा चुनाव- और मुसलमानो की भूमिका



गुजरात चुनाव में मुसलमानो की क्या भूमिका हो ये महत्वपूर्ण सवाल है। देखा जाय तो गुजरात में मुसलमान फैसलाकुन भूमिका में नहीं हैं यानी वे चुनाव को प्रभावित करने की छमता नहीं रखते हैं।

और इस बार जो चुनाव हो रहा है वो सीधे , सीधे Hard Hindutwa और Soft Hindutwa पर हो रहा है। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों की राजनीती हिंदुत्तवा पर हो रही है। भाजपा ,जहाँ हिंदुत्तवा के नारे और प्रतीकों के सहारे ध्रुवीकरण की राजनीती कर रही है वहीँ भाजपा से निपटने के लिए राहुल गांधी ने भी मंदिरों में जाना और दर्शन , पूजन करना शुरू कर दिया है। मुसलमान कोई चुनावी मुद्दा ही नहीं हैं और दोनों पार्टी के घोषणा पत्र या भाषणों में मुसलमानो से सम्बंधित मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं है।

कांग्रेस ख़ास कर G.S.T और नोटबंदी को और उसके दुष्परिणामों को मुद्दा बना रही है। हकीकत यही है कि G.S.T और नोटबंदी ने देश के साथ , साथ गुजरात के वयापार को तबाह कर दिया है। वयापारी और किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। साथ ही भाजपा और संघ के सांप्रदायिक और मनुवादी एजेंडे की वजह से moblynching और गाय की चमड़ी उतारने पर ऊना जैसा काण्ड हो रहा है। दलितों को पीटा जा रहा है और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। आरक्छन आंदोलन में पटेलों पर गोली चलाई गयी और अंधाधुंध गिरफ़्तारी हुई और हार्दिक पटेल पर देशद्रोह का आरोप लगा कर जेल भेजा गया तो पटेल नाराज़ हो गए। इस बार अगर चुनाव आयोग ने गद्दारी नहीं की और E.V.M घोटाला नहीं हुआ तो भाजपा को पराजित होने से कोई रोक नहीं सकता है। 

‎Azhar Shameem


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