सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फ़ैसला नहीं आने पर भी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा- अयोध्या के साधु-संत




1992 में जब बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था उस समय उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वहां सुरक्षा करने के सम्बन्ध में देश की सर्वोच्य अदालत में हलफनामा दिया गया था, बीजेपी, आरएसएस और बाकी हिंदूवादी संगठनों ने देश के कानून को ठेंगा देखते हुए बाबरी मस्जिद को गिरया था, अब उस सम्बन्ध में केस अदालत में विचाराधीन है, उस से पहले ही कट्टरपंथी हिंदूवादियों की तरफ से आये दिन मुहीम चला कर मंदिर के सम्बन्ध में बयानबाज़ी की जा रही है|

केंद्र सरकार के लिए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा चुनौती बन गया है। मुहिम से जुड़े साधु संतों ने मंगलवार को ऐलान किया कि सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फैसला नहीं आने के बावजूद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा।

उनका तर्क है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है इसलिए मंदिर बनाने के लिए विधानसभा और संसद में प्रस्ताव पास कराया जाएगा। वहीं शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि पाकिस्तान व कुछ मुस्लिम संगठन नहीं चाहते कि अयोध्या विवाद का हल हो, क्योंकि इससे उनकी फंडिंग रुक जाएगी।

प्राचीन सिद्धपीठ श्री कालकाजी मंदिर परिसर में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े निर्वाणी अखाड़े के महंत स्वामी धर्मदास महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी, श्री कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि अयोध्या में हर हाल में राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए।

उन्होंने इसके कई तर्क भी दिए। इस मौके पर साधु-संतों ने शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के मंदिर व मस्जिद बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी ऐसा प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में देना चाहिए। इस संबंध में वे सुन्नी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों से बातचीत करके मंदिर निर्माण के लिए सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

संतों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह मंदिर निर्माण को लेकर फैसला देने में देरी नहीं करे। उन्होंने इस मुद्दे पर श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में ही किया जाएगा। परिषद वर्षों से यह लड़ाई लड़ रही है इसलिए अब वक्त नजदीक आने पर कोई श्रेय लेने के लिए आगे न आएं। वैसे उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके पक्ष में आएगा।

हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट करने पर एतराज
झंडेवालान स्थित हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट कर दूसरी जगह स्थापित करने के अदालती आदेश की मंशा पर भी संतों ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हम न्यायालय का सम्मान करते हैं लेकिन इस प्रकार हिंदुओं के हर मामले में हस्तक्षेप करना कतई ही उचित नहीं है और हम इससे स्वीकार नहीं करते।



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