मुसलमान’ बाबरी मस्जिद’ पर कोई समझौता नहीं करेगा- परवेज़ ख़ान




अपराध की शरुवात तब होती है जब इंसान ग़लत को ग़लत, बुरे को बुरा कहने से बचता है, उसका खामोश रहना किसी डर की वजह से हो या किसी हिकमत, मसलिहत के कारण, जुर्म करने वाला मुजरिम कहलाता है, ग़लत को ग़लत न कहना भी जुर्म है और खामोश रहने वाले लोग मुजरिम होते हैं, जब तक जुर्म को सहन किया जाता है ज़ालिम को ताकात, हिम्मत बढ़ती रहती है, लेकिन जब ज़ालिम से सामना किया जाता है तो उसका वजूद बहुत वक़्त तक क़ायम नहीं रह पाता है|

भारत के मुस्लिम्स डर, बदनामी, कायरता के शिकार हो कर आज यहाँ पर सब से असुरक्षित लोग हैं, देश की आज़ादी और बटवारे के बाद मुसलमान को डरा कर रखा गया, आरोप था कि मुसलमानों ने बटवारा कराया है, दशकों तक मुसलमान पर बटवारे का ख़ौफ़ सवार रहा, वह इस डर से ‘कांग्रेस पार्टी ज़िंदाबाद’ कहता रहा,,,उसे अपने आप को बचाना था, साबित करना था कि जो कुछ हुआ था उसका मुसलमानों से कोई वास्ता नहीं था,,,

1990-92 में अयोधा को लेकर शुरू हुए बवाल और मस्जिद की शहादत के बाद, 1993 में मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुए, यह ब्लास्ट दाऊद और उसके लोगों ने किये थे, यह मुंबई के दंगों का जावब था, या बाबरी मस्जिद की शहादत का बदला,,,जो भी कहा, समझा जाये,,,,यह ब्लास्ट देश की एजेंसीज, आरएसएस, मीडिया के लिए अदालत की नज़ीर की तरह काम आये,,,यहाँ से जो आतंकवादी हमले, धमाके होना शुरू हुए, आरोप सीधे मुसलमानों पर मढ़ दिया जाता था, जवाब था,,, ‘बाबरी मस्जिद का बदला’ ले रहे हैं,,,इस से पहले भी यह लोग मुंबई में सैंकड़ों निर्दोष लोगों की जान ले चुके हैं,,,

श्री श्री रविशंकर के बाद अब उत्तर प्रदेश के मंत्री और शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की मुहिम पर काम कर रहे हैं, इनका कहना है कि राम मंदिर के निर्माण में पाकिस्तान रोड़ा अटका रहा है, केस भारत की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की बनाई बेंच इस केस की सुनवाई करेगी, इसका मतलब जैसा कि वसीम रिज़वी ने कहा है कि यह हुआ कि ‘पाकिस्तान का दख़ल भारतीय उच्च न्यायालय पर है’ जिसके दबाव में वह केस को आगे नहीं बढ़ा रहा है, या लटका रहा है,,,,वसीम रिज़वी कौन हैं, क्या हैं, योगी की सरकार बनने से पहले उनके कुनबे, खानदान के लोग ही उनको जानते होंगे, अब उनकी हकतों और बयानों से पूरा देश जान गया है, इन का काम तो वक़्त की सम्पतियों से जुड़े मामले देखना है पर यह अयोध्या में राम मंदिर बनवाने में जुट गए हैं,,,आरएसएस इस तरह के लोगों को ‘तुरुप’ के पत्तों की तरह इस्तेमाल करता है,,,तुरुप का यह छक्का है या दुग्गी काम का नहीं है,,,,अयोध्या मुद्दे का फैसला अदालत को करना है,,,अदालत के सामने इस बात के सभी सबूत हैं कि वहां पर ‘मस्जिद’ थी जिसको ढाया गया है,,,अब से हज़ार साल पहले कहाँ क्या था, और पांच हज़ार साल पहले क्या था यह कोई मुद्दा ही नहीं है, राम चंद्र जी अयोध्या में पैदा हुए थे, वहां बहुत जगह ख़ाली है जहाँ ‘भव्य’ मंदिर का निर्माण हो सकता है,,,,मस्जिद की जगह पर मंदिर बने यह फैसला अदालत के अधिकार में ही नहीं आता है जो वह दे पाये,,,और जिस दिन भी मान लिया जाये कि मस्जिद के स्थान पर मंदिर बनाने का अगर हुकुम सुनाया भी गया तो देश,,,1947 में बटा था,,,भारत एक बार फिर 1947 ही में खड़ा होगा,,,,,

भारत का पौराणिक धर्म सनातन धर्म है,,,,बौद्ध, जैन धर्म है,,,,हिन्दू धर्म का जन्म/उदय बहुत पुराना नहीं है,,,मौर्य साम्राज्य के सभी राजा बौद्ध, जैन धर्म के थे,,,उस समय भारत विश्व में बौद्ध धर्म का केंद्र था, अनेक मंदिर, स्मार्क, इस्तंब उस काल में बौद्धों दुवारा बनवाये गए थे,,,,आज वह सब कहाँ हैं???

भारत से फैला बौद्ध धरम आज चीन, जापान, कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, ताईवान, हांगकांग सहित विश्व के अनेक देशों में बौद्ध धर्म है, भारत से यह कैसे समाप्त हुआ और जो मंदिर उस समय बने थे वह कहाँ गए,,,,संघ और उसके सहयोगियों को बताना चाहिए कि बौद्ध धर्म का नाश किसने किया, उनके धर्म स्थलों पर किस ने कब्ज़ा जमाया??/

अयोध्या का हल है, वह भी बहुत आसान,,,,अदालत वहां पर जैसा कि मस्जिद मौजूद थी बनाने का न सिर्फ आदेश दे बल्कि अपनी निगरानी में बनवाये,,,,या विवादित भू-खंड को कम से कम 1000 साल के लिए दीवारें खड़ी करा के ताला लगा दिया जाये,,,या वहां पर कोई शानदार सा ज़ू (ZOO) रिसर्च सेण्टर आदि का निर्माण करवाये,,,,,,

वसीम रिज़वी जैसे क़ाबिल लोगों की वैसे तो बीजेपी, आरएसएस में भरमार है, कम पड़ने पर और भी मिल जायेंगे भारत में बेरोज़गारों की बहुत बड़ी संख्या है,,,,इन को सोचना चाहिए की आग को भड़काने से कोई फ़ायदा नहीं होता है,,,अयोध्या ‘ज्वालामुखी’ है,,,इस ज्वालामुखी का लावा कहीं,,,,,

मुसलमान कुट लेगा, पिट लेगा, मर जायेगा, बर्बाद हो जायेगा, फ़ाक़े कर लेगा मगर ‘बाबरी मस्जिद’ थी,,,तो थी,,,,इस पर कोई समझौता नहीं करेगा,,,,,

परवेज़ ख़ान (लेखक तीसरी जंग न्युज़ वेबसाईट के एडीटर हैं)



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