अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे म्यांमार को झुकना ही पड़ा, लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने का किया एलान




नई दिल्ली – म्यांमार सरकार ने उन रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने पर सहमती जाहिर कर दी है जिन्हें बोद्ध चरमपंथियों और म्यांमार की सेना ने म्यांमार से भगा दिया था। वैश्विक समुदाय के बढ़ते दबाव के कारण म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों को वापस बुलाने के लिये राजी हो गया है। गौरतलब है कि म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान जिनकी तादाद पांच लाख से भी ज्यादा है वे बंग्लागेश में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं।
जानकारी के लिये बता दें कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रावाई को  अमेरिका ने ‘नस्ली संहार’ करार दिया है। म्यांमार के रखाइन प्रांत में इसी साल 25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़क उठी थी, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस हिंसा मे छ हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या की गई थी, और आठ से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान घायल हुए थे। इतना ही नहीं म्यांमार से जान बचाकर समुन्द्र के रास्ते जाने वाले दो सौ रोहिंग्या मुसलमान दुर्घटना का भी शिकार हुए थे।
अब बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई हफ्तों की बातचीत के बाद दोनों पड़ोसी देशों ने हिंसा की वजह से विस्थापित हुए लोगों की वापसी की व्यवस्था को लेकर हस्ताक्षर किया। म्यांमार की सत्ताधारी पार्टी की प्रमुख नेता आंग सांग सूची की और बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली से बातचीत की और दोनों देशों ने इस बारे में एक करार पर दस्तखत किये हैं।
बांग्लादेश का कहना है कि जिस करार पर दस्तखत किये गये हैं उसको लेकर पिछले कुछ हफ्तों से बातचीत हो रही है और बीते रोज दोनों देशों के आला अधिकारियों ने इसको अमली जामा पहनाया। बांग्लादेश ने एक ने कहा कि दोनों पक्षों ने दो महीनों में शरणाथियों की म्यांमार में वापसी शुरू कराने पर सहमति जाहिर की है।
बंग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली ने मीडिया से बात चीत करते हुए कहा कि यह शुरुआती कदम है वे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हमें काम शुरु करना होगा। बता दें कि रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा पर पोप फ्रांसिस ने भी नाराजगी जाहिर की थी।


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