पीड़ित मोलवियो ने सुनाई आपबीती, कहा- हमारी टोपी देख कर करने लगे मार पीट




नई दिल्ली – बीते बुद्धवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बड़ौत में शामली रहने वाले मौलवियों के साथ असामाजित तत्वों ने बेरहमी से मार पीट की थी, जिसमें तीन मौलवी घायल हो गये थे। अब इस घटना के भुगतभोगी मौलवी ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात चीत के दौरान अपनी आप बीती बयान की है।
पीड़ित ने बताया कि उन लोगों ने हमें पीटना शुरू कर दिया वे हमें पीटते हुए कह रहे थे कि टोपी पहनता है हम सिखायेंगे टोपी पहनना। पीड़ित मौलवी के भतीजे मोहम्मद इसरार ने बताया कि इस घटना के आरोपियों ने उन्हें बर्फ की सिल्लियों से मारा, उन्होंने बताया कि हम नही जानते थे कि उनका मकसद किया है था, लेकिन हमें यह महसूस हो गया कि उन्हें हमारे स्कार्फ और टोपी से परेशानी थी।
20 वर्षीय इसरार ने बताया कि वह अपने चाचा मौलवी गुलजार, 17 वर्षीय अबु बकर और दो अन्य लोगों के साथ पहली मर्तबा दिल्ली स्थित जामा मस्जिद और हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह देखने जा रहे थे, जिसे लेकर वे काफी खुश थे, लेकिन रास्ते में ही उनके साथ यह हादसा हो गया।
डॉक्टरी रिपोर्ट में इस घटना के पीड़ित मोहम्मद इसरार के हाथों, सिर और कमर में गंभीर चोट आईं हैं। पीड़ित मौलवी गुलजार अहमद के मुताबिक शामली से दिल्ली जाते वक्त पर उन पर सात लोगों ने ट्रेन में हमला किया, हमलावर अगले कंपार्टमेंट में बैठे हुए थे। उन्होंने बताया कि वे अहदा स्टेशन पर उतरने वाले थे कि एक शख्स से उनका रास्ता रोक लिया, और ट्रेन की खिड़कियां बंद करके उनके साथ मार पीट करने लगे। पीड़ित गुलजार ने बताया कि उन्हें कुछ समझ नही आ रहा था कि उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
पीड़ित गुलजार के मुताबिक जब वे लोग हमें पीट रहे थे तो एक शख्स ने उनसे कहा कि टोपी पहनता है, टोपी पहनना हम सिखायेंगे। पीड़ित के मुताबिक ट्रेन सिर्फ आधा मिनट के लिये ही अहदा स्टेशन पर रुकी थी, इसके बाद ट्रेन चलने लगी तो आरोपियों ने चैन खींच दी और उतरकर सुनहरा गांव की तरफ भाग गये। मौलवी गुलजार के मुताबिक ट्रेन में इतने लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने भी उन्हें बचाने या छुड़ाने की कोशिश नही की।



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