गाय से दूरी बनाकर भी मुसलमानों की हत्या नहीं रुकेगी! सच्चे गौरक्षक होते तो भाजपा के गोवा दफ्तर पर हमला करते




ये बात सही है कि गाय से धार्मिक भावना जुडी होने का सिर्फ ढकोसला है, वरना अगर वाक़ई गाय से श्रद्धा जुड़ी होती तो भीड़ का निशाना उमर, पहलू और अख़लाक़ नही बल्कि बीजेपी के दफ़्तर बनते, क्योंकि बीजेपी वाले ही गोवा और पूर्वोत्तर में जनता को गोमांस खिलाने का खुलेआम आश्वासन देते हैं.
ये भी सच है कि मुसलमान गाय से दूरी बना कर भी किसी दूसरे बहाने से इन हत्यारों के निशाने पर रहेगा, क्योंकि हत्यारों का मेन मक़सद मुसलमानों की हत्या है, न कि अपने धर्म से कोई मतलब.
लेकिन इसके बावजूद मैं मुसलमानों को यही सलाह दूंगी कि आप फिर भी इस गाय नाम के जानवर को बिलकुल ही छोड़ दो, ये जिनकी माँ है वही पालें, आप भैंस पालो, बकरी पालो, ऊंट पालो.
गाय पालना कोई फ़ायदे का सौदा है ही नहीं… भैंस का दूध ज़्यादा भी होता है, और क्रीमी भी, बूढ़ी हो जाए तो कसाई को बेखटक बेंचो.
चलिये जो गाय पहले से आपके यहां पली हुई है और क्योंकि अब हिन्दू भी गाय नही ख़रीदते उनको पला रहने दीजिये, मगर नई गाय ख़रीदने में कोई समझदारी नही, जिस जानवर को बूढ़ा होने पर आप बेच नही सकते, वो फ़ायदे का सौदा हो भी किस तरीक़े से सकता है ???
छोड़ दीजिये इस जानवर को, फिर देखिये कुछ दिनों में ही कैसी अव्यवस्था फैलेगी, अभी से किसान आवारा गायों के आतंक से त्राहि त्राहि कर रहे हैं, ये गायें महानगरों में सड़कों पर होने वाले कई एक्सीडेंट्स की वजह बन रही हैं… खबरें ये भी आती रहती हैं कि खुद हिन्दू किसान आवारा गायों को मारने लगे हैं.
बस यही सब कुछ जब बढ़ता जाएगा तो जाके उन लोगों की आंखें खुलेंगी जो लोग आज मुसलमानों की हत्याओं को मौन समर्थन दिया करते हैं… लेकिन ये हालात पैदा होने के लिए आपको मज़बूत संकल्प लेने की ज़रूरत है,
शबनम ख़ान 

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