अला हजरत के उर्स में उलमाओं ने कहा बैंड बाजे वाली शादियों का बहिष्कार करें




बरेली:आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खान के उर्स में शामिल होने आए देश और विदेश के तमाम उलेमा और शहर काजी मुफ़्ती असजद रज़ा खान ने आम मुसलमानों में फ़ैल रही गलत रस्मो रिवाज और ऐसी बातों की जिनका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है का शरीयत की रोशनी में खुल कर मजम्मत की.
उलेमाओं ने देश के मुसलमानों से अपील करते हुए शादियों में फिजूलखर्ची जैसे बैंड बाजा और डीजे आदि के इस्तेमाल पर रोक लगाने की गुजारिश की. साथ ही उलेमाओं ने मस्जिदों के इमामों से गुजारिश की गई कि वो जुमे की नमाज में इन मसलों पर चर्चा करें. साथ ही मुसलामनों से ऐसी शादियों का बहिष्कार भी करे.
इसके अलावा तीन तलाक के मुद्दें पर भी रौशनी डाली गई. तलाक के मुद्दें पर कहा गया कि यह मुसलमानों का शरई मामला है और तलाक के मसले पर तब्दीली किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं.
उलेमाओं ने कहा कि अगर किसी मर्द ने अपनी बीवी को तीन तलाक एक ही वक्त में दिया है तो शरीयत की रोशनी में तीन तलाक मान्य होगी.एक वक्त में तीन तलाक कुरआन एवं हदीस का फैसला है जिसमें कोई आलिम या मुफ़्ती भी बदलाव नहीं कर सकता.


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