अगर इन तीनों का जादु चल गया तो गुजरात में भाजपा की हार तय है- ये है समीकरण




नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी में कड़ी टक्कर चल रही है. पिछले 22 सालों में पहली बार कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्कर देती हुई दिख रही है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में अग्रेसिव कैंपेन कर रही है. जबकि हमेशा विपक्ष पर हमलावर होकर करारा प्रहार करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र अपने ही गढ़ गुजरात में डिफेंसिव दिख रहे हैं. मोदी के ना तो वह हमलावर वाला रूख दिख रहा है और ना ही वह विपक्ष पर खुलकर करारा प्रहार कर पा रहे हैं.
गुजरात में कांग्रेस के पक्ष में कई सारे समीकरण जा रहे हैं. दरअसल बीजेपी यहां पिछले 22 सालों से सत्ता में है. जिससे उसके खिलाफ पूरे गुजरात में एंटी इंकंबेंसी है. गुजरात में बीजेपी के खिलाफ एक माहौल बन रहा है. वहीं बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के खेमें लगातार नेताओं की लामबंदी बढ़ रही है.
हार्दिक, अल्पेश और मेवाणी का समीकरण
गुजरात तीन युवा नेताओं का दौर चल रहा है. पहले नंबर पर आते हैं हार्दिक पटेल. हार्दिक पटेल उस समुदाय से हैं, जो बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है. लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर पटेल समुदाय इतना अग्रेसिव है कि वह अब बीजेपी को हराने की बात कर रहा है. दरअसल पटेल आऱक्षण आंदोलन  के दौरान कई युवा मारे गए थे, जिसको लेकर पटेल समुदाय अच्छा खास रोष है.
ओबीसी नेता ‘अल्पेश ठाकोर’
ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर  बकायदा कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. अल्पेश ओबीसी समुदाय से आते हैं. पूरे गुजरात में ओबीसी 54 प्रतिशत के आस पास है. अल्पेश का कांग्रेस में जाना बीजेपी के लिए बड़ा खतरा रहा है. क्योंकि ये ओबीसी वोटर बीजेपी को वोट देते आ रहे थे, लेकिन इस बार बीजेपी से नाराज होकर कांग्रेस के पाले में खड़े होते दिख रहे हैं.
जिग्नेश मेवानी का ‘दलित कार्ड’
जिग्नेश मेवानी के साथ 7 फीसदी दलित वोटर अच्छी खासी पकड़ है. जिग्नेश मेवानी मोदी के गुजरात मॉडल से आजादी की बात करते हैं. वह कहते हैं कि मोदी के कथित गुजरात मॉडल से गुजरातियों को आजादी चाहिए. जिग्नेश मेवानी सार्वजनिक तौर कई बार बीजेपी को हराने की बात कर चुके हैं.
122 सीटों पर बीजेपी के लिए मुश्किल!
 गुजरात में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी का असर 122 सीटों पर है. ये नेता अगर कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा अपील कर देते हैं तो बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत हो सकती है. कुछ वरिष्ठ पत्रकारों का आंकलन है कि अगर अल्पेश, हार्दिक और जिग्नेश का जादू चल गया तो बीजेपी का हाल कहीं दिल्ली जैसा ना हो जाए.
निसार सिद्दीकी

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