मुसलमानो! डर, बुजदिली, दलाली छोड़ो, सियासी ताकत पैदा करो वर्ना कोई नामलेवा न बचेगा- अशफाक़ रहमान




जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय कंवेनर अशफाक रहमान ने मुसलमानों को ललकारते हुए कहा है कि वे बुज़दिल और डरपोक बन गये हैं जो ईरान, अरब रोहिंग्या मुसलमानों के लिए आंसूं बहाते हैं पर अपने देश में ही पहलू खान, जुनैद और अखलाक को मौत के घात उतार देने के बावजूद चादर तान कर सोये रहते हैं.
अशफाक रहमान ने कहा कि भारत के मुसलमान अपने विरोधियों द्वारा तय किये गये एजेंडे पर तो नाचते हैं पर अपना कोई एजेंडा तय नहीं कर पाते. उन्होंने कहा कि जो कौम अपना एजेंडा तक तय नहीं कर पाती वह हाशिये पर चली जाती है. अशफाक ने मुसलमानों को झकझोरते हुए कहा कि कोई आपके( मुसलमानों) के जीने के अधिकार को छीन लेना चाहता है और आप बुजदिली की चादर ओढ़ कर सोये हुए हैं. क्या आपको खौफ और आतंक ने नामर्द बना दिया है?
बिहार की सियासत में मुसलमानों को जगाने का बिड़ा उठाने वाले अशफाक रहमान ने एक बयान जारी कर कहा है कि  मुसलमान आज डर के मारे अपने खोल में दबे हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह से डरने वालों को समझना चाहिए कि अगर वह आज एकजुट हो कर आवाज नहीं उठायेंगे तो कल किसी और की बारी आयेगी और इस तरह आपका जनाजा उठाने वाला भी कोई नहीं बचेगा.
अशरद मदनी पर एफआईआर पर भी चुप मुसलमान
अशफाक रहमान ने उलेमा को निशाने पर लेते हुए कहा कि सऊदी अरब या म्यांमार में मुसलमानों को कुछ हो जाये तो वे सड़कों पर उतर आते हैं पर अपने ही देश के लोगों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ एक लफ्ज नहीं बोलते. अशफाक रहमान ने कहा कि हमारे देश के जांबाज, निडर और बेबाक लीडर मौलाना अरशद मदनी पर केस दर्ज कर दिया जाता है लेकिन  इसके बावजूद मुसलमानों में कोई बेचैनी नहीं होती. अशफाक ने मुसलमानों की बुजदिली पर ललकारते हुए पूछा कि आप कितने डरपोक हैं?
अशफाक रहमान ने उन मुस्लिम नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो कहते हैं कि हिंदू हों या मुसलमान सभी शूद्र हैं, उन्हें इतिहास या तो माफ नहीं करेगा या उन्हें कहीं गुम कर देगा.

सियासत को दलाली समझने की मानसिकता से निकलें
अशफाक रहमान ने चिंता जताते हुए कहा कि मुसलमान सियासत की चाल को या तो नहीं समझते या समझने की कोशिश ही नहीं करते, लेकिन जो थोड़े लोग समझते भी हैं वे सियासत को दलाली का साधन भर समझते हैं. ये ऐसे लोग हैं जो सियासी दुकान सजा कर बैठे हैं.
अशफाक रहमान ने मजहबी रहनुमाओं को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि वे  सियासत को अपने निजी नफा नुकसान के तराजू में तौलते हैं और न तो सियासत में खुद ही सीधा दखल देना चाहते हैं और न ही मुस्लिम कयादत वाली पार्टी के पक्ष में उतरते हैं बल्कि वे अन्य पार्टियों की दलाली को ही अपनी कामयाबी समझते हैं.
अशफाक रहमान ने कहा कि मजहबी लीडरान मुसलमानों को समझाते हैं कि यह दुनिया कैदखाना है और यह कि उनके लिए असल जिंदगी आखिरत की जिंदगी है. मगर वे भूल जाते हैं कि  कैदखाने में तो इंसान को मुजरिम की तरह रहना है. ऐसे नेताओं ने ही इस देश को कैदखाना बना दिया है. अशफाक रहमान ने मुसलमानों से अपील की कि वे ऐसी मानसिकता से बाहर आयें और दूसरी पार्टियों के नेताओं को कांधे पर उठाने के बजाये अपना नेतृत्व खुद विकसित करें.


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