मुसलमानों ने देश को दो ‘कलाम’ दिये एक ने भारत को शिक्षा में मजबूत बनाया, तो दूसरे ने मिसाईल बनाकर देश को ताक़तवर बनाया




हम मुसलमान है साहब, हिंदुस्तान के मुसलमान, वतन से बेपनाह मोहब्बत करने वाले मुसलमान, दिल में हिंदुस्तान रखने वाले मुसलमान। हमने इस मुल्क़ को दो अनमोल रत्नों से नवाज़ा। हमने अपने मुल्क़ को दो कमाल के कलाम दिए। एक ने इस देश को शिक्षा संपन्न बनाने में खुद को न्योछावर कर दिया तो दूसरा इस देश को शक्ति संपन्न बनाने के लिए पूरी ज़िंदगी जूझा रहा।
एक ने पाकिस्तान बनाए जाने का सबसे ज़्यादा विरोध किया और मुल्क़ के मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोक दिया और कहा की रुको मुसलमानों ये हिंदुस्तान ही तुम्हारा मुल्क़ है तो दूसरे ने शक्तिशाली बमों से लैस मिसाईले बनाकर उसका रुख़ कराची और लाहौर की तरफ़ मोड़ दिया और सदा लगा दी की ख़बरदार जो मेरे मुल्क़ की तरफ़ आँख उठाकर देखने की भी ज़ुर्रत की।
एक ने इस देश को IIT और UGC की सौगात देकर देश में शिक्षा क्रांति का आधार रखा तो दूसरे इस देश को परमाणु संपन्न बनाकर देशवासियों की छाती गर्व से चौड़ी कर दी। एक ने भारत की एकता और अखंडता के लिए खुद को समर्पित कर दिया तो दूसरा भी उसी के नक्शे कदम पर चलते हुए सामाजिक एक और गंगा जमुनी तहज़ीब का पुरोधा बना।
एक गोरों से लड़कर हिंदुस्तान की आज़ादी का का साक्षी बना तो दूसरे ने आज़ाद हिंदुस्तान को बड़े बड़े सपने देखने का हौसला दिया। एक ने जीते जी भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया तो दूसरा इस देश का राष्ट्रपति बनकर भी खाली हाथ राष्ट्रपति भवन से विदा हुआ।
आज यानी 11 नवंबर को देश के पहले कलाम अबुल कलाम आज़ाद का जन्मदिन है जिसे पूरा हिंदुस्तान “राष्ट्रीय शिक्षा दिवस” के रूप में मना रहा है। सलाम है कलम की ताक़त के दम पर देश को शिक्षा संपन्न और शक्ति संपन्न बनाने वाले भारत के दोनों रत्नों पर। सलाम है वतन से मोहब्बत का पैगाम देने वाले इन दोनों योद्धाओं को।
इस्लाहुद्दीन अंसारी (लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)


No comments

Need a News Portal, with all feature... Whatsapp me @ +91-9990089080
Powered by Blogger.