तुर्की के कड़े तेवरों के बाद NATO ने तैय्यब एर्दोगान से मांगी माफी




इस्ताम्बुल/नई दिल्ली-पश्चिमी देशो के सैन्य संघठन NATO ने तुर्की के प्रेसिडेंट रेसेप तैय्यप एर्दोगान से माफ़ी मांगी है,NATO ने ये माफ़ी नामा तुर्की द्वारा सैन्य संघठन के नार्वे में सैन्य अभ्यास से बहिष्कार के बाद किया है.बता दे तुर्की ने NATO पर राष्ट्रपति रेसेप तैय्यब एर्दोगान और आधुनिक तुर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क के अपमान का आरोप लगाया था.
NATO के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्तोल्टबेंनबर्ग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो घटनाक्रम हुआ है वो दुखद और वे इसके लिए तुर्की से माफ़ी मांगते है.हलाकि NATO ने माफ़ी मांगते हुए तुर्की द्वारा किस बात पर नाराज़गी हुई है इसकी कोई जानकारी नही दी.तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलू ने दावा किया है कि आधुनिक तुर्की के निर्माता एर्दोगान की तस्वीर से छेड़छाड़ कर देश के लोगो की भावनाओ को आहत किया गया.एक और घटना में एर्दोगान नाम को दुश्मन का मान बता कर सैन्य अभ्यास का टारगेट बनाया गया.
इस घटना की जानकारी होते ही तुर्की ने नार्वे में NATO के युद्द अभ्यास से सेनाओ को वापस बुला लिया और इसे ना सहन करने वाली घटना बताया.इस घटना पर नार्वे के रक्षा मंत्री फ्रैंक बक्के जेन्सेन ने भी माफ़ी मांगी है.तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जो हुआ उसके बाद हम अपने सैनिको को युद्दभ्यास से अलग कर रहे है.
नार्वे के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कंप्यूटर द्वारा बनाये गये आपत्तिजनक चित्रों बनाने वाले टेकनिचियन ने माफ़ी मांग ली है और इस तरह के आपत्तिजनक चित्रों को NATO ने नहीं बल्कि प्राइवेट फर्म ने बनाया था जिनको की टेंडर दिया गया था.वही NATO ने अपमान करने वालो के खिलाफ नार्वे सरकार को कार्यवाई करने का निवेदन किया है.
बता दे NATO अमेरिका द्वारा नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन है जो सोवियत संघ से मुकाबला करने के लिए कई पश्चिमी देशो द्वारा बनाया गया था जिसमे तुर्की भी अहम सहयोगी है.तुर्की 1952 में NATO का सदस्य बना था.


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