सरदार पटेल ने जिस RSS को घातक कहा था अब वही लोग उनकी मूर्ति बनाकर पापों से मुक्ति चाहते हैं: राज बब्बर



महापुरूषों पर कब्जा जमाने का आजकल एक नया ट्रेंड चला है। राजनीतिक पार्टियों को लगने लगा है कि वो देश के महापुरूषों को ट्वीटर पर याद करके, मूर्ति पर माला चढ़ा कर, उनके नाम पर योजनाएं चला कर उनको हासिल कर लेंगे।
किसी भी राजनीतिक पार्टी में ये प्रतिस्पर्धा नहीं है कि कैसे महापुरूषों के विचारों को पार्टी का अनुशासन बनाया जाए।
सबसे हास्यास्पद तो ये है कि जो नेतागण सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती और पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हैं वही नेतागण हेडगेवार और सावरकर को भी याद करते रहते हैं।
जबकि सरदार पटेल ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद उस आरएसएस पर 4 फरवरी 1948 को प्रतिबंध लगावा दिया था जिसके संस्थापक हेडगेवार थे।
हेडगेवार, गोलवलकर के विचार और सरदार पटेल के विचार में जमीन आसमान का फर्क है लेकिन हमारे नतागणों ने विचारों का पचरंगा अचार बना दिया है। सभी विचारधार के नेताओं को समान रूप से याद करना, माला चढ़ाना, ट्विट करना ट्रेंड बन चुका है जो कि एक खतरनाक राजनीति के लक्षण हैं।
सोचने वाली बात है जो नेता आज सरदार पटेल के विचारों को सर्वोत्तम बता रहा है वो आज से पहले हेडगेवार के विचारों पर भी सहमती जता चुका है। मतलब साफ है ये एक राजनीतिक भूख है जो नेताओं को महापुरूषों के आगे झुकने को मजबूर कर देता है।
हमारे नेताओं को सरदार पटेल, महात्मा गांधी, भगत सिंह के विचारों से कोई लेना देना नहीं है, उनके लिए जयंती और पुण्यतिथि राजनीति चमाकाने का अवसर बन चुका है।
अभिनेता से राजनेता बने राज बब्बर ने आज एक सभा में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ये स्वीकार किया है कि वो आरएसएस के हैं। मोदी द्वारा सरदार पटेल की मूर्ति बनाना परपंच है। अगर आज आरएसएस महात्मा गांधी की मूर्ति बना दे तो मुक्त नहीं हो जाएगा।
सरदार पटेल ने आरएसएस के बारे में कहा था कि तुम आतंकवादी हरकतों में लिप्त हो, गांधी की हत्या में लिप्त हो। राज बब्बर ने अपने ट्विट में लिखा कि ‘पटेल की मूर्ति बनाकर बीजेपी और आरएसएस – पटेल द्वारा उनकी घातक विचारधारा पर की गयी टिपण्णी से मुक्ति चाहतें हैं। ये संभव नहीं है’



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