ओवैसी के अलावा भी 22 मुस्लिम साँसद हैं- फिर मुस्लिम विरोधी बिल के खिलाफ दो ही वोट क्यों पड़े?




नई दिल्ली:लोकसभा ने गुरुवार को लंबी बहस के बाद आखिरकार ऐतिहासिक मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पास कर दिया,केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी अपनी मेज थपथपाकर खुशी जाहिर की. गुरुवार को देशभर की निगाहें सदन की कार्यवाही पर गड़ी रहीं और करीब पांच घंटे की बहस के बाद यह बिल पास हो गया।
लोकसभा में बहस के दौरान RJD, BJD और सपा समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया. इन पार्टियों ने बिल में सजा के प्रावधान को गलत बताया है और इसका कड़ा विरोध किया. लोकसभा में बिल पर बहस का मुद्दा ही सजा का प्रावधान रहा. इसके बाद विपक्षी दलों की ओर से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पर पेश किए गए संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई।
हालांकि वोटिंग के दौरान सभी संशोधन प्रस्ताव गिर गए और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस बिल के पास होने की घोषणा कर दी. इस दौरान कांग्रेस ने कहा कि सिर्फ मोदी सरकार ही इस बिल को पास कराने का श्रेय नहीं ले सकती है. कांग्रेस समेत किसी भी विपक्षी दल ने इस बिल का विरोध नहीं किया. कांग्रेस ने बिल को सिर्फ स्थायी समिति के पास भेजने की बात कही थी।
ओवैसी के तीन संशोधन प्रस्ताव समेत सभी प्रस्ताव खारिज
लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पर लंबी बहस के बाद संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई. इस बिल पर AIMIM प्रमुख असादुद्दीन ओवैसी की ओर से पेश किए गए तीनों संशोधन प्रस्ताव पूरी तरह खारिज हो गए. ओवैसी के पहले संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ दो वोट पड़े, जबकि विरोध में 241 सदस्यों ने वोट किया. इसके अलावा ओवैसी के दूसरे संशोधन प्रस्ताव के विरोध में 242 सदस्यों ने वोट किया, जबकि 2 वोट पक्ष में पड़े. इसके अतिरिक्त ओवैसी का तीसरा प्रस्ताव भी खारिज हो गया।
यूँ तो होने को 23 मुसलमान साँसद लोकसभा के सदस्य हैं लेकिन जब शरीयत से टकराने वाले क़ानून पर वोटिंग का नम्बर आया तो किसी ने भी मोदी सरकार के खिलाफ वोट नही किया और प्रस्तावित क़ानून पर सहमति जताई।
सिर्फ अकेले एक साँसद असदउद्दीन ओवैसी क़ानून में संशोधन को लेकर अड़े और बदलाव की माँग करी लेकिन उनके संशोधन को वोटिंग में खारिज़ कर दिया गया ओवैसी को सिर्फ दो वोट मिले जबकि प्रस्तावित बिल के पक्ष में 241 सदस्यों ने वोट किया ,ओवैसी के अलावा किसी भी मुस्लिम सदस्य ने आवाज़ नही उठाई।
वेस्ट बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉंग्रेस के चार मुस्लिम साँसद हैं और टीएमसी सदन की चौथे नम्बर की बड़ी पार्टी है सबकी नजर थी कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर थी जो पश्चिम बंगाल में मुसलमानों से जुड़े मसलों पर ज़ोर शोर से अपनी बात रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी ने तीन तलाक़ जैसे अहम मुद्दे पर अपनी बात रखेगी ऐसी लोगो को उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और किसी भी सदस्य ने सदन में होने वाली बहस में हिस्सा नही लिया और वोटिंग से पहले ही सदन छोड़कर चले गए ।
भारत के सबसे बड़े सदन की 16 वी लोकसभा में आज़ादी के 70 सालों में सबसे कम सदस्य यानी साँसद चुनकर गए हैं,देखिए कौन कहाँ से जीत कर गया है।
  1. असदउद्दीन ओवैसी -Aimim पार्टी से हैदराबाद के साँसद हैं
  2. सिराजुद्दीन अजमल -AIUDF के बारपेटा आसम से साँसद हैं
  3. बदरूद्दीन अजमल -AIUDF के ढुबरी असम से साँसद हैं।
  4. तस्लीमुद्दीन राष्ट्रीय जनता दल से अरर्रया बिहार से सांसद हैं।
  5. तारिक़ अनवर -नेशनल कोंग्रेस पार्टी से कटिहार बिहार से साँसद से हैं।
  6. चौधरी महबूब अली क़ैसर- LJP से खगड़िया बिहार से साँसद हैं
  7. असरारुल हक़ क़ासमी-कॉंग्रेस के किशनगंज से सांसद हैं
  8. मेहबूबा मुफ़्ती पीडीपी की अनन्तनाग जम्मू कश्मीर से साँसद बनी थी
  9. मुज़फ़्फ़र हुसैन बैग -पीडीपी के बारामुल्ला जम्मू कश्मीर के साँसद हैं।
  10. तारिक़ हमीद कर्रा-पीडीपी के श्रीनगर जम्मू कश्मीर के साँसद हैं
  11. ई अहमद-इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के मल्लापुरम केरला से साँसद हैं
  12. ई टी मोहम्मद बशीर -इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के पोन्नानी से साँसद हैं
  13. एमआई शाहनवज़-कोंग्रेस के वायनाड केरला से साँसद हैं
  14. मोहम्मद फैज़ल लक्षदीप से साँसद हैं
  15. अनवर राजा AAIADMKR के रामन्थापुरम तमिलनाडु से सांसद हैं।
  16. इदरीस अली -TMC के बशीरहाट वेस्ट बंगाल के साँसद हैं
  17. मुमताज़ सँघामित्रा TMC के लोकसभा साँसद हैं
  18. अबू हसीम खान चौधरी कोंग्रेस के मालदा से लोकसभा के साँसद हैं
  19. मौसम नूर कॉंग्रेस के मालदा उत्तर वेस्ट बंगाल से साँसद हैं
  20. बदरुदुज़ा खान CPIM मुशीराबाद वेस्ट बंगाल के साँसद हैं
  21. मोहम्मद सालिम खान CPIM रायगंज वेस्ट बंगाल से साँसद हैं
  22. सुल्तान अहमद-TMC के पश्चिमी बंगाल से साँसद हैं
  23. आफ़रीन अली-TMC से आरामबाग के लोकसभा साँसद हैं
    सदन में सबसे ज्यादा मुस्लिम सांसद बंगाल से जीतकर आए हैं. वहां से आठ मुस्लिम सांसद चुने गए हैं. ममता की पार्टी तृणमूल के चार मुस्लिम साँसद हैं कांग्रेस के दो और सीपीआई के दो सांसद हैं। बिहार से चार सांसद चुनकर आए, जिनमें कांग्रेस, आरजेडी, एनसीपी और लोक जनशक्ति पार्टी से एक-एक सांसद चुना गया. असम से दो मुस्लिम सांसद चुने गए. दोनों ही यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से हैं, जबकि कश्मीर से तीन मुस्लिम सांसद हैं. केरल से भी तीन मुस्लिम सांसद जीते हैं.तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश से एक-एक सांसद है।
    इससे साफ पता चलता है कि तमाम पार्टियों के मुस्लिम प्रतिनिधि अपनी पार्टी की विचारधारा के खिलाफ नही जासकता है और तमाम पार्टियों ने इस बिल को मन्ज़ूर कराने का मन बना लिया था जिससे ये बात साफ होती है कि जब तक मुसलमान अपना कोई सियासी प्लेटफार्म नही बना लेते हैं तब तक मुसलमानों की आवाज़ में दम नही पड़ेगा।
    मुफ़्ती ओसामा नदवी (लेखक हक़िक़त हिंदी के मुख्य संपादक हैं)

    No comments

    Need a News Portal, with all feature... Whatsapp me @ +91-9990089080
    Powered by Blogger.