युपी निकाय चुनाव: वो पांच ग़लतियां जिसकी वजह से कांग्रेस का सुपाड़ा हुआ साफ़



लखनऊ: यूपी निकाय चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने कांग्रेस के लिए नया सिरदर्द खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने महापौर की 16 सीटों में से 14 सीटें अपने नाम कर यूपी निकाय चुनाव में कांग्रेस का सुपड़ा साफ कर दिया है। बीजेपी की इस जीत ने कांग्रेस पार्टी के लिए गुजरात के चुनावी सफर को और भी मुश्किल बना दिया है।
गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस की इस करारी हार को बीजेपी अपना हथियार बनाना चाहेगी। बहरहाल, अगर अभी सिर्फ यूपी चुनाव की ही बात करे तो आखिर कांग्रेस की इस करारी हार के पीछे की कौन सी वजह रही, आखिर ऐसे कौन-कौन से कारण हैं कि निकाय चुनाव में कांग्रेस का सुपड़ा ही साफ हो गया? तो चलिए नजर डालते हैं उन्हीं कारणों पर।
पहला कारण:
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक नहीं लिया। जिस तरह से भाजपा ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया, कांग्रेस ने वैसी गंभीरता दिखाना शायद मुनासिब नहीं समझा। बीजेपी ने इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए हर तरह से लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की और इसी का नतीजा है कि बीजेपी जीतने में सफल रही।
दूसरा कारण:
अगर हार की एक और वजह तलाशने की कोशिश करें तो कांग्रेस ने इस चुनाव में अपने बड़े नेताओं को नहीं उतारा। राहुल गांधी की एक भी रैली राज्य में आयोजित नहीं की गई, ये भी हार की एक वजह है। राहुल गांधी गुजरात चुनाव पर ही अपना ध्यान लगाए रहे और उन्होंने यूपी की तरफ एक बार भी नहीं देखा। राहुल गांधी और कांग्रेस आलाकमान को विधानसभा में मिली हार के बाद इस चुनाव को पार्टी की अस्मिता से जोड़कर देखने की जरूरत थी।
तीसरा कारण:
कांग्रेस के लिए स्टार प्रचारकों ने वो करिश्मा नहीं दिखाया, जैसा कि अकेले सीएम योगी ने दिखा दिया। कांग्रेस ने यूपी निकाय चुनाव में अपनी ओर से स्टार प्रचारक के रूप में राज बब्बर, राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद और प्रमोद तिवारी को जरूर उतारा, मगर इन नेताओं ने यूपी की जनता को उस तरह लुभाने की कोशिश नहीं की, जैसा कि बीजेपी वालों ने किया। कांग्रेस के पास इससे भी बेहतर स्टार प्रचारक हो सकते थे, मगर कांग्रेस ने उन्हें इस चुनाव से दूर ही रखा।
चौथा कारण:
भाजपा ने जिस तरह से बूथ लेवल तक अपनी पहुंच बनाई और डोर-टू-डोर जाकर लोगों से सीधा संवाद किया, वैसा करने में कांग्रेस नाकाम रही। भाजपा पार्टी ने इस चुनाव में भी अमित शाह की रणनीति ‘बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं को जोड़ना और सदस्य बनाना’ को अपनाया और इसी के सहारे चुनाव जीतने में कामयाब रही।
पांचवा कारण:
यूपी विधानसभा में मिली बुरी हार के बावजूद कांग्रेस ने अपनी खोई जमीन को तलाशने के लिए उतना जोर नहीं लगाया, जितना लगाने की जरूरत थी। कांग्रेस ने शायद होमवर्क नहीं किया। इस चुनाव में भी कांग्रेस अपनी ठोस रणनीति से जूझती रही। कांग्रेस अपनी रणनीति में ये दो चीजें शामिल नहीं कर पाईं- बूथ लेवल तक के लोगों को पार्टी से जोड़ना और लोगों से सीधे संवाद करना।



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