जानिए क्या है तीन तलाक़ पर लोकसभा में पास होने वाला क़ानून- वो 6 बातें जो आपको जान लेना चाहिये




नई दिल्ली: लोकसभा में तीन तलाक के संबंधित बिल को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया। विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ये कानून महिलाओं के अधिकार और न्याय के लिए है, किसी प्रार्थना, धर्म या धार्मिक प्रथाओं से संबंधित नहीं है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कानून मंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। हम एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें  मुस्लिम समाज की महिलाएं सम्मान के साथ जिंदगी बिता सकें। इसके साथ ही इस कानून के जरिए दशकों से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। ये बात अलग है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने  बिल के कुछ प्रावधानों से ऐतराज जताया। 
कैसा होगा बिल?
  1. मोदी सरकार ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017’ नाम से इस विधेयक को लाई है. ये कानून सिर्फ तीन तलाक (INSTANT TALAQ, यानी तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा. इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पुरुष अगर अपनी बीबी को तीन तलाक देगा, तो वो गैर-कानूनी होगा.
  2. इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक, वह चाहें मौखिक हो या लिखित हो और या फिर मैसेज के जरिए हो, अवैध होगा. जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है यानी तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय ( Cognizable) अपराध होगा.
  3. इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली,  सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे.
ऐसा है प्रस्तावित बिल
  1. – एक साथ तीन बार तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) कहना गैरकानूनी होग
  2. – ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाएगा.
  3. – यह कानून सिर्फ ‘तलाक ए बिद्दत’ यानी एक साथ तीन बार तलाक बोलने पर लागू होगा.
  4. – तलाक की पीड़िता अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से अपील कर सकेगी.
  5. – पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है. मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.
  6. – यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा है.

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