तुर्की के फ़ौजियों ने क़तर में उठने वाली बगावत और तख्ता पलटने की साज़िश को कुचल डाला



दुनिया के विकसित देशों में से एक क़तर से 5 जून, 2017 को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन ने अपने कूटनीतिक संबंधों खत्म कर दिया था,इस लिये क़तर में एक सन्गठन ने सरकार का तख्ता पलट करने के लिये कोशिशें की थी लेकिन तुर्की फ़ौज ने उनको नाकाम कर दिया।
क़तर के एक दैनिक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि तुर्क सेना ने मध्य पूर्व में जन्मे खतरनाक राजनीतिक संकट में उस समय बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब उन्होंने अमीर क़तर शेख तमीम बिन हम्माद अल सानी के खिलाफ उठने वाली संभावित राजनीतिक बगावत खत्म कर दिया ।

पत्रकार ने अपने लेख में खुलासा किया है कि तुर्क सेना ने दोहा में अमीर क़तर के शाही महल को बगावत से एक रात पहले अपने संरक्षण में ले लिया था जिसके कारण बागियों के हौसले टूट गए और बगावत नाकाम होगई जिस कारण आज क़तर सुरक्षित है।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात कथित तौर पर क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अलसानी को हटाना चाहते थे क्योंकि इन देशों का मानना है कि अमीर क़तर आतँकवाद का संरक्षण करते हैं और ईरान से अपने सम्बन्ध मज़बूत बना रहे हैं।
लेख के अनुसार, सऊदी और अमीरात फ़ौज को अमीर क़तर पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने का मौक़ा नही मिल पाया और वे आखिरकार आधे रास्ते से ही वापस लौट गए।

एक सरकारी प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लगभग 200 तूर्क सैनिकों को 5 जून की रात अमीर क़तर के महल की रक्षा करने के आदेश जारी किए गए थे ताकि कोई शक्ति या बल उन्हें क़ब्ज़े में लेकर तख्ता पलट ना करसके।
क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अलसानी ने तुर्की राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान से टेलीफोन पर बात करके सरकार पर मंडराने वाले खतरे के बारे में बताया था और इस मौके पर मदद मांगी थी जिसके बाद राष्ट्रपति ने तुर्की फ़ौज को अमीर क़तर के महल की सुरक्षा संभालने और उनकी सुरक्षा करने के आदेश दिए थे।



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