जब गांधी जी ने औरंग़ज़ेब की तारीफ करते हुए कहा था' औरंगज़ेब के शासन-काल में हमें दंगों का कोई हवाला नहीं मिलता’




नई दिल्ली – राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने पर पीएम मोदी ने राहुल गांधी को औरंगजेब बताया था। दरअस्ल औरंगजेब की छवी को धूमिल करने की बार बार कोशिशें की जाती रही हैं, माना जाता है कि अंग्रेजों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच फूट डालने के लिये औरंगजेब को क्रूर शासक के तौर पर पेश किया था।
बीबीसी हिन्दी ने महात्मा गांधी के उन लेखों और वक्तव्यों को प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने औरंगजेब की तारीफें की थीं। बीबीसी के मुताबिक ‘गांधी जी ने इंग्लेंड में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि आप अंग्रेज़ों के आने से पहले के इतिहास को देखें, उसमें आपको हिंदू-मुस्लिम दंगों के आज से ज्यादा उदाहरण नहीं मिलेंगे. …औरंगज़ेब के शासन-काल में हमें दंगों का कोई हवाला नहीं मिलता’
औरंगजेब की सादगी गांधी जी को उनकी और खींचती थी
औरंगज़ेब के बारे 21 जुलाई, 1920 को ‘यंग इंडिया’ में लिखे अपने मशहूर लेख ‘चरखे का संगीत’ में गांधी ने कहा था, “पंडित मालवीयजी ने लिखा है कि जब तक भारत की रानी-महारानियां सूत नहीं कातने लगतीं, और राजे-महाराजे करघों पर बैठकर राष्ट्र के लिए कपड़े नहीं बुनने लगते, तब तक उन्हें संतोष नहीं होगा. उन सबके सामने औरंगज़ेब का उदाहरण है, जो अपनी टोपियां खुद ही बनाते थे.” गांधी जो औरंगजेब की तरफ जो बात खींचती थी वह थी औरंजेब की सादगी और उनका श्रमनिष्ठा।
20 अक्तूबर, 1921 को गुजराती पत्रिका ‘नवजीवन’ में उन्होंने लिखा, “जो धनवान हो वह श्रम न करे, ऐसा विचार तो हमारे मन में आना ही नहीं चाहिए. इस विचार से हम आलसी और दीन हो गए हैं. औरंगज़ेब को काम करने की कोई ज़रूरत नहीं थी, फिर भी वह टोपी सीता था. हम तो दरिद्र हो चुके हैं, इसलिए श्रम करना हमारा दोहरा फर्ज है.”
(नोट – यह बीबीसी के लेख का संक्षिप्त अंश है आप पूरा लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें)

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