मुग़लों से ज़्यादा हिन्दू राजाओं ने मंदिरों को ढ़हाया है- इतिहासकारों ने पेश किए सबूत





चेन्नई:मुस्लिम शासकों को फ़िल्म का विलेन बनाने में भगवा विचारधारा रखने वाले लोग कहीँ कोई कसर नही छोड़ रहे हैं,इसी लिए स्कूल कॉलेज के सलेब्स में से मुस्लिम बादशाहों का नाम धीरे धीरे हटाया जारहा है,टीपू सुल्तान जिनके बलिदान पर देश को गर्व् है ,अँग्रेज़ टीपू का नाम सुनकर थर्राने लगता था,उसी शेर टीपू को गद्दार बनाने के लिए कोई कसर नही छोड़ी जारही है।
देश में मुस्लिम इतिहास को मिटाने वाली साज़िश को नाकाम करने के लिए IOS आइओएस के सचिव डाक्टर मंजूर आलम ने नई पीढ़ी को देश की वास्तविक इतिहास से रूबरू होने का मशवरा दिया। उनहोंने इतिहास का हवाला देते बताया कि हिन्दू बादशाहों ने मुग़ल से ज्यादा मंदिरों को ढहाई है।
इंस्टीच्युटऑफ़ ऑब्जेक्टिव स्टडीज नई दिल्ली के प्रायोजित न्यू कॉलेज के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में आइओएस के सचिव डाक्टर मंजूर आलम ने कहा कि समाजी और सियासी सूरमाओं ने 1947 में देश को बांटा था, और अब वही ताकतें 2002 के गुजरात और 2013 के मुजफ्फरनगर मुस्लिम विरोधी दंगों को जन्म दे रही हैं। लेकिन यह बात याद रखनी चाहिए कि सरकार की मदद से हुई तबाही के बाद दुसरे दौर की शुरुआत में काफी रुकावटों और हंगामे का सबब बनता है।
डाक्टर मंजूर आलम ने इतिहासकारों से अपनी सारी कोशिशों को इतिहास के संरक्षण और ध्यान देने वाली बातों पर अपनी तहकीकात की विषय बनाने की अपील करते हुए कहा कि अब देश के अन्दर इतिहास की राजनीति की जा रही है, इसे वो लोग करते हैं जो खुद अपनी इतिहास लिखने के लायक नहीं हैं।
इस मौके उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर इतिहासकार जैसे जद्दो नाथ सरकार और आरसी मजुमदार ने औरंगजेब को एक हिन्दू विरोधी शासक,करार दिया, विशेषकर मंदिरों को गिराने की इसकी पोलोसी को ज्यादा उभारा है। लेकिन इतिहासकारों ने इसके विपरीत जवाब देते हुए बताया है कि हिन्दू बादशाहों ने मुग़ल से ज्यादा मंदिरों को ढहाई है,इस मौके पर कपिल सिब्बल,जे एम अकबर,प्रोफेसर अख्तरुल वासे के अलावा सैकड़ों बुद्धिजीवी ने सम्बोधित किया।

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