फलकनुमा पैलेस: जहां PM मोदी ने इवांका ट्रम्प की मेज़बानी की, कभी सबसे अमीर भारतीय उस्मान अली खान का ठिकाना था




हैदराबाद का फालकनुमा पैलेस एक बार फिर से चर्चा में हैं। भारत सरकार यहां अमेरिकी इवांका ट्रम्प की मेजबानी कर रही है। फलकनुमा पैलेसे का रिश्ता हैदराबाद के मशहूर निजाम से रहा है। भारत में विलय से पहले फलकनुमा पैलेस निजाम का अधिकारिक आवास हुआ करता है। इस फैमिली के पास एक जमाने में इंडियन गवर्नमेंट से भी ज्यादा पैसे थे। हालांकि आज हालात यह हैं कि उसके वारिसों को एक छोटे से फ्लैट में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं हैदराबाद के आखिरी निजाम उस्मान अली खान और उसके वारिसों के बारे में .

हैदराबाद के आखिरी निजाम का नाम उस्‍मान अली खान सिद्दीकी था। बताया जाता है कि निजाम 20 करोड़ डॉलर (1340 करोड़ रुपए) की कीमत वाले डायमंड का यूज पेपरवेट के तौर पर किया करता था। मोतियों को लेकर उसका शौक और उसके घोड़ों के बारे में आज भी हैदराबाद के आसपास कई कहानियां सुनने को मिलती हैं।
हैदराबाद के निजाम का शासन मुगल सल्‍तनत के तौर पर 31 जुलाई 1720 में शुरू हुआ था। इसकी नींव मीर कमारुद्दीन खान ने डाली थी। जबकि उस्‍मान अली खान इस डाइनेस्‍टी के आखिरी निजाम था। भारत सरकार से भी ज्‍यादा अमीर था निजाम. निजाम उस्‍मान अली खान को अब तक का सबसे अमीर भारतीय माना जाता है। टाइम और फॉर्च्‍यून जैसी मैगजीन्‍स ने उस्‍मान को यह खिताब दिया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1940 के दशक में उस्‍मान अली खान की कुल संपत्ति करीब 2 अरब डॉलर थी। उस वक्‍त अमेरिका की इकोनॉमी का करीब 2 फीसदी थी। आजादी के भारत का कुल रेवन्‍यू महज एक अरब डॉलर था, जबकि निजाम के पास 2 अरब डॉलर की संपत्ति थी।
उस्मान अली ने अंग्रेजों के चले जाने के बाद 1947 में भारतीय संप्रभुता के समक्ष समर्पण करने से इंकार कर दिया। अंग्रेजों के साथ विशेष गठबंधन की दुहाई देते हुये उन्होने संयुक्त राष्ट्र संघ में हैदराबाद की पूर्ण स्वतन्त्रता का अपना मामला रखा। उन्होने अपनी सत्ता का समर्पण करने की भारत की चेतावनी को अस्वीकार कर दिया, परंतु सितंबर 1948 में भारतीय सैनिकों की शक्ति के सामने उन्हें झुकना पड़ा। उन्हें रियासत का राजप्रमुख बनाया गया, परंतु उन्हें निर्वाचित विधायिका के प्रति जबाबदेह कैबिनेट मंत्रियों की सलाह पर चलना था। यह व्यवस्था 1956 के सामान्य सीमा पुनर्गठन के कारण उनकी रियासत के पड़ोसी राज्यों में विलय होने तक कायम रही।
इसके बाद वे तीन पत्नियों, 300 नौकरों, ब्रिद्ध आश्रितों और निजी सेना सहित वैभवशाली सेवानिवृत्ति का जीवन व्यतीत करने लगे। उन्होने अपने पूर्व समय के लगभग 10,000 राजकुमारों और दास-दासियों को पेंशन प्रदान की और फिलिस्तीन के मुस्लिम शरणार्थियों को सहायता दीक


No comments

Need a News Portal, with all feature... Whatsapp me @ +91-9990089080
Powered by Blogger.