झारखंड में मुस्लिम युवक की पीट-पीट कर हत्या, दो की हालत गंभीर




झारखंड के मांडर कस्बे में नाच-गाने से मना करने पर भीड़ ने कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी. इसके बाद इलाके में तनाव है.
इस घटना में इसी समुदाय के दो और युवक घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है. पुलिस उपाधीक्षक और मांडर के थाना प्रभारी सुमित कुमार ने बताया है कि मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. इस इलाके में अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती की गई है.
पुलिस के मुताबिक हालात नियंत्रण में हैं और हमलावरों की पहचान के साथ गिरफ्तारी के लिए छापामारी अभियान चलाया जा रहा है. इस बीच मृत युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए रांची स्थित राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान भेजा गया है.
यह घटना झारखंड की राजधानी रांची से करीब तीस किलोमीटर दूर की है. मारे गए युवक का नाम वसीम अंसारी है, जबकि इस घटना में नुरूल अंसारी और मन्नान अंसारी घायल हुए हैं. सभी लोग मांडर स्थित बाजार टांड़ के रहने वाले हैं.
वसीम अंसारी की उम्र 19 साल बताई जा रही है. दो दिन पहले ही वो पुणे से मजदूरी कर लौटे थे. उसके पिता उलफान अंसारी गोलगप्पा (फुचका) बेचकर जीवन यापन करते हैं.
पुलिस उपाधीक्षक ने बीबीसी को बताया है कि पूरे मामले में तफ्तीश जारी है. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मांडर के पतराकोना चंदाबारी में एक जनवरी को युवकों के अलग-अलग समूह नए साल पर वनभोज कर रहे थे.
इस मौके पर वो लोग बाजे के साथ नाच-गाना भी कर रहे थे. वसीम अंसारी कुछ दोस्तों के साथ वहां पहुंचे और युवकों की भीड़ से नाच-गाना करने को मना किया.
नाच-गाना करने वाले लोगों की संख्या कहीं ज्यादा थी. वसीम के चारों ओर भीड़ थी. फिर भीड़ ने कथित तौर पर उन पर हमला बोल दिया.
इस घटना के बाद मांडर बाजार टांड़ के गुस्साए लोगों ने रात में दूसरे गांव चटवल के घरों में हमला किया. इस घटना में आदिवासी समुदाय के तीन लोगों के घायल होने की खबर है. इससे पहले बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतर गए. लोगों का आरोप है कि नाच-गाना और हमले करने वाले चटवल के ही थे.
इधर, मंगलवार की सुबह युवक की हत्या के विरोध में गुस्साये लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग ( रांची- डालटनगंज) को जाम कर दिया. काफी मशक्कत के बाद पुलिस जाम हटा सकी.
रांची स्थित पोस्टमार्टम हाउस में भी मांडर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं. गांव के हसीबुल अंसारी का आरोप है कि सिर्फ़ लोहे की छोलनी से नहीं बल्कि भीड़ ने बुरे तरीके से वसीम की हत्या की है.
लाश की हालत देखने से ही सारा माजरा समझ में आता है.
हसीब अंसारी बताते हैं कि जिस जगह पर घटना हुई है, वह कब्रिस्तान से सटा है. इस जगह पर नाच-गाना करने के साथ भीड़ धमाल मचा रही थी.
उन्होंने बताया कि वसीम ने कब्रिस्तान के पास यह सब करने से मना किया, तो उसे मार डाला गया. नुरूल और मन्नान भागने में सफल रहे, वरना वे दोनों भी मारे जाते.
हसीब का दावा है कि चटवल गांव के युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया है. उन्हें यह कहने से भी गुरेज नहीं कि यहां भीड़ द्वारा अक्सर किसी निर्दोष को मारे जाने का चलन हो गया है.
वसीम के मौसा ( खालू) मोहम्मद जिकीरूल्ला का दावा है कि कब्रिस्तान की हिफाजत के वास्ते ही वसीम आगे बढ़े और मारे गए. वे हमलावरों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा उसके घर वालों को मुआवजे की भी मांग पर जोर दे रहे थे. उनका कहना है कि गरीब घर का एक सहारा मारा गया है.
वसीम के एक और परिजन आसिक अंसारी ने कहा कि कब्रिस्तान के पास खाना- पीना- नाचना- गाना ठीक नहीं और इसे मना करने पर मौत की सज़ा दी गई. वे लोग इंसाफ चाहते हैं.
जबकि पुलिस और प्रशासन का पक्ष है कि अभी इन सवालों पर जांच बाकी है. उनकी प्राथमिकता घायलों का इलाज कराना, गुस्साये लोगों को समझाना तथा पीड़ित परिवार की मदद करना है.
साभार बीबीसी


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