एक सफ़र में अल्लाह के रसुल रोते हुए कहीं चले गए,और वापस आये तो मुस्कुरा रहे थे,




उम्मुल मोमिनीन सय्य्दा आयशा रज़ी अल्लाहु अन्हा फरमाती है कि अल्लाह के नबी हज के सफ़र में जब हजून के मक़ाम पर पहुंचे तो बहुत रो रहे थे,और बहुत ज्यादा ग़मगीन थे,अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इस हालत में देख कर मैं भी रोने लगी,अल्लाह के नबी रोते हुए मुझे ऊँट पर छोड़ कर कहीं चले गए,और बहुत देर के बाद जब वापस आये तो मुस्कुरा रहे थे,मैंने अर्ज़ किया आप जब गए थे तो रो रहे थे अब खुश हैं मामला क्या है?अल्लाह के नबी ने फ़रमाया मैं अपनी माँ की कब्र पर गया था और अल्लाह ताला से सवाल किया कि वह उनको जिंदा करदे,अल्लाह ने उनको जिंदा कर दिया वह मुझ पर ईमान ले लाई,फिर अल्लाह ने उनको मौत दे दिया.
एक और रिवायत में है कि अल्लाह के रसूल ने अपने माँ बाप दोनों लोग के लिए अल्लाह से दुआ की तो दोनों लोगों को जिंदा कर दिया गया फिर वह लोग ईमान ले आये.
(ज़र्कानी अलल मवाहिब जिल्द 1 पेज 168,अल्हावी लिल फतावा जिल्द 2 पेज 440)


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